Monday, November 16, 2015

KAM DHENU कामधेनु

KAM DHENU कामधेनु
CONCEPTS & EXTRACTS IN HINDUISM By :: Pt. Santosh Bhardwaj dharmvidya.wordpress.com   hindutv.wordpress.com santoshhastrekhashastr.wordpress.com 
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SURBHI is the title (brand name) given to the divine Bovine cow species-breed-variety, who can fulfill desires and grant boons to the deserving ascetics-Yogis, who meditate and concentrate in the Almighty for social cause-benefits-welfare upliftment.
Her emergence varies from one cosmic era Man Vantar & Maha Yug to another. One Indr's era constitutes of one Man Vantar which constitutes of divine 71 Maha Yug. One divine Maha Yug has 1000 Divine Chatur Yug (Sat Yug, Treta Yug, Dwapar Yug and Kali Yug) which sees the working of 14 Manu’s. One Manu’s Period is slightly more than 71 6/14 Man Vantars.
Kamadhenu - divine goddess cow: The Devi Bhagwat Puran narrates that the Almighty Bhagwan Shri Krashn and Maa Radha were enjoying dalliance (in Gau Lok,गौ लोक), when they thirsted for milk. So, Krashn created a cow called Surbhi and a calf called Manorath from the left side of his body and milked the cow. When drinking the milk, the milk pot fell on the ground and broke, spilling the milk, which became the Ksheer Sagar, the cosmic milk ocean. Numerous cows then emerged from the pores of Surbhi's skin and were presented to the cowherd-companions (-Gops) of Bhagwan Shri Krashn by him. Then Bhagwan Shri Krashn worshiped Surbhi and decreed that she would grant milk and prosperity and be worshiped at Diwali on Bali Pratipad day.
The Maha Bharat-Adi Parv, illustrates the origin of Kamdhenu-Surbhi due to the churning of the cosmic ocean (Samundr Manthan, समुन्द्र मन्थन) by the demigods-deities and the giants-demons to acquire Amrat (-अमृत)-ambrosia-elixir-nectar of life. She was presented to the sages-ascetics-Sapt Rishis, to help them in performing rituals, Yagy-Hawan-sacrifices-Agnihotr etc. 
कामना  पूर्ति करने वाली दैवी शक्ति जो गाय के रूप में रहती है, कामधेनु कहलाती है। उनसे ही समस्त गौ धन की उत्पत्ति हुई है। उनके शरीर में समस्त देवी-देवताओं का निवास है। महा भारत के आदिपर्व में उल्लेख है कि समुन्द्र मन्थन में अमृत और अनेक रत्नों के साथ वे भी प्रकट हुईं। वो ही दक्ष प्रजापति की पुत्री  क्रोधा वसा जिनका विवाह कश्यप ऋषि के साथ हुआ की पुत्री भी हैं। 
Surbhi is the daughter of sage Kashyap and his wife Krodhavasa, the daughter of Daksh. Her daughters Rohini and Gandharvi are the mothers of cattle-cows and buffaloes and horses respectively.[Ramayan]
Nandini is the cow-daughter of Surbhi-Kamdhenu. She is a form of Devi-Divine Mother. Ikshwaku King Prathu milked Prathvi in the form of  a cow when all seeds disappeared into her, for the sake of his citizens. Mother Earth-Prathvi acquires the form of a cow when ever she comes to the Almighty. All the demigods are believed to reside in her body. Her four legs are the scriptural Veds; her horns constitute the trinity of  Brahma (tip), Vishnu (middle) and Mahesh (base); her eyes are the Sun and Moon, her shoulders Agni and Vayu and her legs the Himalay. 
Kamdhenu shows her with the body of a white Zebu cow, crowned woman's head, colorful eagle wings and a peacock's tail.
Kamdhenu, accompanies Bhagwan Dutta Trey. She denotes the Brahminical aspect and Vaeshnav (-वैष्णव) connection of the deity contrasting with the accompanying dogs which symbolizing a non-Brahminical aspect. She also symbolizes the Panch Bhut (-the five classical elements). Bhagwan Dutta Trey is sometimes depicted holding the divine cow in one of his hands.
The Anushasan Parv of the epic Maha Bharat narrates that Surbhi was born from the belch of the creator (-Prajapati) Daksh after he drank the Amrat that rose from the Samudr Manthan. Surbhi gave birth to many golden cows called Kapila, who were called the mothers of the world. The Shatpath Brahman describes her origin from the breath of the Daksh Prajapati. The Udyog Parv of Maha Bharat narrates that Brahma Ji drank so much Amrat that he vomited some of it, from which Surbhi emerged.
The Matsy Puran describes Surbhi as the consort of Brahma Ji and their union produced the divine cow Yogeshwari, the eleven Rudr and various divine lower animals, goats, swans and high class drugs. She is then described as the mother of cows and quadrupeds. The Hari Vansh, an appendix of the Maha Bharat, calls Surbhi the mother of Amrat (-ambrosia), Brahmans, cows and Rudrs.
Surbhi has been described as the mother of Nandini in Maha Bharat. Nandini, like her mother, is a cow of plenty. Nandini was stolen by the divine Vasus and thus cursed by Vashishth to be born on the earth. The Raghu Vansh by Kali Das mentions that king Dilip, an ancestor of Bhagwan Shri Ram, once passed by Kam Dhenu-Surbhi, but failed to pay respects to her, thus incurring the wrath of the divine cow, who cursed the king to go childless. So, since Kam Dhenu had gone to Patal, the guru of Dilip, Vashishth advised the king to serve Nandini, Kam Dhenu's daughter who was in the hermitage. The king and his wife propitiated Nandini, who neutralized her mother's curse and blessed the king to have a son, who was named Raghu.
काम धेनु जमदग्नि ऋषि और ऋषि वशिष्ठ के पास भी थीं।  
Kamdhenu was in the possession of both Jamdagni and Vashishth. The kings who tried to steal her from the sage ultimately faced dire consequences for their actions. Vishwamitr who forcefully tried to snatch her from Vashishth had to retract due to sewer loss leading him to asceticism.

भगवान परशुराम द्वारा क्षत्रियों का 21 बार संहार :- Jamdagni's cow:  Sahastr Bahu (-Thousand-armed) Haehay king, Kart Veery Arjun, destroyed Jamdagni's hermitage and captured the calf of Kam Dhenu. To retrieve the calf, Jamdagni's son Bhagwan Parshu Ram slew the king, whose sons in turn killed Jamdagni. Parshu Ram then destroyed the Kshatriy (-warrior, marshal castes) race 21 times and his father was resurrected by divine grace.

भगवान् परशुराम, भगवान् विष्णु के छठे अवतार हैं। उन्होंने तत्कालीन अत्याचारी और निरंकुश क्षत्रियों का 21 बार संहार किया। महिष्मती नगर के राजा सहस्त्रार्जुन क्षत्रिय समाज के हैहय वंश के राजा कार्तवीर्य और रानी कौशिक के पुत्र थे | सहस्त्रार्जुन का वास्तवीक नाम अर्जुन था। उन्होने दत्तत्राई को प्रसन्न करने के लिए घोर तपस्या की। दत्तत्राई उसकी तपस्या से प्रसन्न हुए और उसे वरदान मांगने को कहा तो उसने दत्तत्राई से 10,000 हाथों का आशीर्वाद प्राप्त किया।  इसके बाद उसका नाम अर्जुन से सहस्त्रार्जुन पड़ा| इसे सहस्त्राबाहू और राजा कार्तवीर्य पुत्र होने के कारण कार्तेयवीर भी कहा जाता है|

वो घमंड में चूर होकर धर्म की सभी सीमाओं को लांघ गया। उसके अत्याचार व अनाचार से जनता त्रस्त हो चुकी थी| वेद-पुराण और धार्मिक ग्रंथों को मिथ्या बताकर ब्राह्मण का अपमान करना, ऋषियों के आश्रम को नष्ट करना, उनका अकारण वध करना, निरीह प्रजा पर निरंतर अत्याचार करना, यहाँ तक की उसने अपने मनोरंजन के लिए मद में चूर होकर अबला स्त्रियों के सतीत्व को भी नष्ट करना शुरू कर दिया था। 

भगवान् परशुराम के पिता, जमदग्नि ऋषि के पास कामधेनु थी। महिष्मति पुरी  का राजा सहस्त्रबाहु अर्जुन उनके आश्रम में पहुँचे तो महर्षि ने उनका यथोचित स्वागत किया। उसने महर्षि से कामधेनु माँगी। जब महर्षि ने कामधेनु देने में असमर्थता व्यक्त की तो सहस्त्रार्जुन ने बल पूर्वक कामधेनु को आश्रम से ले गया। जब परशुराम आश्रम लौटे तब महर्षि ने उन्हें बताया कि सहस्त्रार्जुन कामधेनु को ले गया है। परशुराम जी उसी क्षण सहस्त्रार्जुन के महल को गये और उसे कामधेनु लौटाने के लिये कहा। सहस्त्रार्जुन ने कहा कि वह गाय वापस नहीं करेगा। ऊसने अपने सैनिकों को आदेश दे दिया, परशुराम जी को पकड़ कर कैद कर लिया जाये। परशुराम ने क्रोध में भरकर सभी सैनिकों को मार दिया। सहस्त्रार्जुन अपने सभी सैनिकों और पुत्रों सहित परशुराम से युद्ध करने लगा।

सहस्त्रार्जुन को दत्तात्रेय भगवान का आशीर्वाद प्राप्त था कि उसे पृथ्वी पर उसे कोई क्षत्रिय राजा हरा नहीं सकता एवं युद्ध के समय उसके हजारों हाथ होंगे। अत: वह अपने हजारों बाहु के साथ लड़ने लगा। सहस्त्रार्जुन और  भगवान् परशुराम का युद्ध हुआ। भगवान् परशुराम के प्रचण्ड बल के आगे सहस्त्रार्जुन बौना साबित हुआ। भगवान् परशुराम ने दुष्ट सहस्त्रार्जुन की हजारों भुजाएं और धड़ परशु से काटकर उसका वध कर दिया।

परशुराम जी ने उसके अधिकांश सैनिकों व पुत्रों को मार डाला। इसके बाद परशुराम कामधेनु को लेकर आश्रम लौट आये। महर्षि जमदग्नि ने कहा कि परशुराम जी को प्रायश्चित करना होगा। परशुराम तीर्थ यात्रा पर चले गये।
जब सहस्त्रार्जुन के बचे हुए पुत्रों को जब पता चला कि परशुराम तीर्थ यात्रा पर गये हैं तो वे सब बदला लेने के लिये आश्रम पहुँचे। उस समय आश्रम में केवल माता रेणूका और महर्षि जमदग्नि थे। सहस्त्रार्जुन पुत्रों ने आश्रम के सभी ऋषियों का वध करते हुए, आश्रम को जला डाला।  उन्होंने ध्यानमग्न महर्षि जमदग्नि का सिर काट दिया और माता रेणुका को मारने लगे। माता रेणुका ने अपने पुत्र परशुराम को पुकारा। परशुराम जी माता की पुकार सुनकर आश्रम पहुँचे तो उन्होंने माता को विलाप करते देखा और माता के समीप ही पिता का कटा सिर और उनके शरीर पर 21 घाव देखे। भगवान् परशुराम बहुत क्रोधित हुए और उन्होंने शपथ ली कि वह हैहय वंश का ही सर्वनाश नहीं कर देंगे बल्कि समस्त क्षत्रिय वंशों का संहार कर भूमि को क्षत्रिय विहीन कर देंगे। भगवान् परशुराम ने  21  बार पृथ्वी को क्षत्रिय विहीन करके उनके रक्त से समन्तपंचक क्षेत्र के पाँच सरोवरों को भर कर अपने संकल्प को पूरा किया| महर्षि ऋचीक ने स्वयं प्रकट होकर भगवान् परशुराम को ऐसा घोर कृत्य करने से रोका तब जाकर किसी तरह क्षत्रियों का विनाश भूलोक पर रुका। तत्पश्चात  भगवान् परशुराम ने अपने पितरों के श्राद्ध क्रिया की एवं उनके आज्ञानुसार अश्वमेध और विश्वजीत यज्ञ किया। अपने पिता का शरीर भाईयों के पास छोड़कर, सहस्त्रार्जुन के महल मे गये। वहाँ परशुराम जी ने सहस्त्रार्जुन के बचे हुये पुत्रों को मार डाला। आश्रम लौट कर वे पिता के शरीर को लेकर कुरुक्षेत्र गये और वहाँ पर मंत्र शक्ति से पिता के सिर को जोड़कर उन्हें जीवित कर दिया और उन्हें सप्तऋषि मंडल में सातवें ऋषि के रूप में स्थापित कर दिया ।
Vashishth's cow: Vishwamitr with his army arrived at the hermitage of sage Vashishth. The sage welcomed him and offered a huge banquet to the army, that was produced by Sabla-a Kam Dhenu. Vishwamitr asked the sage to part with Sabla and instead offered thousand of ordinary cows, elephants, horses and jewels in return. However, the sage refused to part with Sabla, who was necessary for the performance of the sacred rituals and charity by the sage. Agitated, Vishwamitr seized Sabla by force, but she returned to her master, fighting the king's men. She hinted Vashishth to order her to destroy the king's army and the sage followed her wish. Intensely, she produced Pahlav warriors, who were slain by Vishwamitr's army. So, she produced warriors of Shak-Yavan lineage. From her mouth, emerged the Kambhoj, from her udder Barvaras, from her hind Yavans and Shaks, and from pores on her skin, Harits, Kirats and other foreign warriors. Together, the army of Sabla killed Vishwamitr's army and all his sons. This event led to a great rivalry between Vashishth and Vishwamitr, who renounced his kingdom and became a great sage to defeat Vashishth.
WORSHIP BY BHAGWAN SHRI KRASHN IN GAU LOK: Kam Dhenu-Surbhi is prayed-worshiped by Bhagwan Shri Krashn in the Gau Lok. She is revered in the heavens and the Patal-the netherworld. Surbhi inhabits the lowest realm of Patal (-पाताल), known as Rasa Tal (-रसातल), has for daughters: the Dikpalis-the guardian cow goddesses of the heavenly quarters; Sharbhi in the east, Harshika in the south, Subhadra in the west and Dhenu in the north.
Surbhi lives in the abode of Varun the deity of water, as well. Her flowing sweet milk constitutes Kshirod or the Kshir Sagar, the cosmic ocean of milk. This milk has six flavors and has the essence of all the best things of the earth. She went to Mount Kailash and worshiped Brahma Ji for 10,000 years. The pleased god conferred goddess-hood on the cow and decreed that all people would worship her and her children-cows.
Bhagwan Shiv cursed her, for suggesting to have found the end of the ling of aura-Shiv Ling by Brahma Ji; that her off springs would eat filth in Kali Yug. The cows were cursed by Maa Sita as well to eat waste during Kali Yug.

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