Monday, June 8, 2015

HARMONIOUS FAMILY RELATIONS मधुर पारिवारिक सम्बन्ध

HARMONIOUS FAMILY RELATIONS 
मधुर पारिवारिक सम्बन्ध  
CONCEPTS & EXTRACTS IN HINDUISM
By :: Pt. Santosh  Bhardwaj 
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अपने घर-परिवार के परस्पर संबंधों का खुलासा कभी भी बहु के सामने नहीं करना चाहिये। अपनी विगत जिन्दगी के बारे में उसे बताना, अपना रोना उसके सामने रोना, कल को भारी पड़ सकता है। लड़के को भी अपने किसी अन्य से मैत्री सम्बन्धों को उजागर नहीं होने देना चाहिये। अपनी कमजोरी-बुराइयाँ उसके सामने कभी जाहिर न होने दें, अन्यथा कल को पछताने का वक्त भी नहीं मिलेगा। अपनी धन-सम्पत्ति का खुलासा-ब्यौरा भी उसके सामने न ही करें तो बेहतर है। चीज-वत्स, जेवर आदि के बारे में कभी न बतायें। आते ही सर पर न चढ़ायें। धीरे-धीरे उसे समझें, सहज होने दें और उसे मौंका दें कि वो आपको समझे और आप उसे समझें। 
बद्तमीज, बदजुबान, जिद्दी-हठी लड़की का स्वभाव बहुत जल्दी जाहिर हो जाता है। उसके मुँह कभी न लगें और उससे यथा संभव किनारा कर लें या तटस्थ हो जायें। उसके माँ-बाप का अपमान या बुराई न ही करें तो बेहतर है। दहेज की इच्छा-लालच, माँग आपके लिये कल को परेशानी का सबब बन सकती है। शादी-विवाह समान स्तर, गौत्र, जान-पहचान, जाति में ही निभता है। 
(1). अपने बेटे और पुत्र वधु को विवाह उपरांत अपने साथ रहने पर जोर नहीं देना चाहिये। अगर वो अलग रहना चाहते हैं, तो विरोध न करें और न ही किसी किस्म की टीका-टिप्पणी करें। अगर घर में अलग जगह है, तो उन्हें वो उनके माँगने पर दे सकते हैं और अलग रसोई रखने पर पर भी उदासीनता दिखायें। अगर वो किराये का मकान लेकर रखना चाहें तो जाने दें। बच्चों के घरों की दूरी सम्बंधों को वेहतर बना सकती है। 
किसी भी हालत में जीते जी अपनी जायदाद-धन सम्पत्ति बच्चों के नाम न करें।
One should never insist the son and his wife to live at the same place-premises. If they want to remain away and maintain separate kitchen, let them do so. If there is enough space to give them in your property-house and maintain independent domain, let them do it. If they wish to sift to a rented house whether far or near, let them do it. 
Never transfer your property in their name under any circumstances or pressure.
(2). अपनी पुत्र वधु से अपने पुत्र की पत्नी की तरह व्यवहार करें, न कि अपनी बेटी की तरह, आप मित्रवत् हो सकते हैं। आप का पुत्र सदैव आप से छोटा रहेगा, किन्तु उस की पत्नी नहीं, अगर एक बार भी उसे डाँट देंगें तो वह सदैव याद रखेगी। वास्तविकता में केवल उसकी माँ ही उसे डाँटने या सुधारने का एकाधिकार रखती थी, आप नहीं। आजकल की लड़कियाँ माँ-बाप की भी नहीं सुनतीं आपकी परवाह क्या और कैसे करेंगी?!
Son's wife can not take the place of a daughter. At the most behave like a friend with her but do not expect reciprocation from her. Never try to be harsh with her or to dictate her.
Present day girls do not listen even to their parents, how and why should they listen to you?! 
(3). आपकी पुत्रवधु की कोई भी आदत या उस का चरित्र किसी भी अवस्था मैं आप की समस्या नहीं, अपितु आपके पुत्र की परेशानी है, क्योंकि वह व्यस्क है। उनके परस्पर सहज व्यवहार में बाधक न बनें, किसी प्रकार के उपदेश, मार्गदर्शन-सीख को बहु तो क्या बेटा भी सुनने को तैयार नहीं होगा। यह दूसरी बात है कि बेटे को परेशानी होगी तो बाप को उसे बचाने के लिये आगे आना हो पड़ेगा। 
Habits, traits, values are acquired through the interaction in the society, family, school, pear group, friends, films etc. She has her way of looking at the things and its very rare to expect a change in her behaviour just by stepping into family hood-in laws house. Her mannerism, interactions have to be cared by her husband. One should never try to teach, negotiate, guide, the bride since even the son is not willing to listen you. This generation discard the elders by calling-brandishing it as generation gap. A father is bound to come forward when his son is under stress-difficulty, trouble. Provide help, protect him and isolate again.
(4). इकट्ठे रहते हुए भी अपनी अपनी जिम्मेदारियाँ स्पष्ट रखें, उनके कपड़े न धोयें, खाना न पकायें या आया का काम न करें, जब तक पुत्र वधू उसके लिए आप से न कहे और अगर आप ये करने में सक्षम हैं एवम् प्रति उपकार भी नहीं चाहते हैं। विशेषतः अपने पुत्र की परेशानियों को अपनी परेशानियाँ न बनाए, उसे स्वयं हल करने देंं। 
Never over burden yourself with the domestic chores of the son and his wife. Let them do their own day to day routine work themselves even preparing breakfast.  Even when living together, make each others businesses clear, don't do their laundry, don't cook for them and don't baby sit their children. Unless, of course, there is a request from son's wife and you feel that you're capable and don't expect anything in return. Most importantly, you shouldn't worry about your son's family problems. Let them settle themselves
(5). जब वह लड़ रहे हों, गूंगे एवम् बहरे बने रहें। यह स्वभाविक है कि छोटी उम्र के पति पत्नी अपने झगड़े में अविभावकों का हस्तक्षेप नहीं चाहते।
Pretend to be blind and deaf when your son and his wife are arguing-quarrelling. It's normal that the young couple do not like their parents to be involved in the dispute between husband and wife. 
(6). आपके पोती-पोते केवल आप के पुत्र एवम् पुत्र वधू के हैं, वे उन्हें जैसा बनाना चाहते हैं बनाने दें, अच्छाई या बुराई के लिए वह स्वयं जिम्मेदार होंगे।
Your grandchildren totally belong to your son and his wife. However, they want to raise their children,  it is up to them.  The credit or blame would be on them.
(7). आप की पुत्रवधु को आप का सम्मान या सेवा करना जरुरी नहीं है, यह आप के बेटे का दायित्व है।आप को अपने बेटे को ऐसी शिक्षा देनी चाहिए कि वह एक अच्छा इन्सान बने जिससे आपके और आप की पुत्र वधु के सम्बंध अच्छे रहें।
Your son's wife need not necessarily respect and serve you. It is the son's duty.  You should have taught your son to be a better person so that you and your son's wife relationship could be better.
(8). अपनी सेवानिवृति को सुनियोजित करें, अपने बच्चों से उस में ज्यादा सहयोग की उम्मीद-अपेक्षा न करें। आप बहुत से पडाव अपनी जीवन यात्रा में तय कर चुके हैं और अभी भी जीवन यात्रा में बहुत कुछ सीखना-करना बाकि है।
Do more planning for your own retirement, don't rely on your children to take care of  your retirement. You had already walked through most of your journey in life, there are still a lot of new things to learn & do through out the journey.
(9).थोड़ा-थोड़ा करके सेवानिवृति के बाद के समय के लिए संचित करते रहें और इसको गुप्त ही रखें। अगर जरूरत पड़े और सम्भव हो तो बच्चों की मदद कर दें अन्यथा मौन धारण कर लें। यह समय जीवन का भरपूर आनन्द-सुख लेने के लिए और प्रभु की भक्ति को समर्पित करने के लिये ही है। अगर थोड़ा बहुत दान-पुण्य कर सकें तो और भी अच्छा है। किसी की मदद और सामाजिक कार्य करके स्वयं को व्यस्त रखा जा सकता है।Keep on saving bit by bit for the retired life and keep it confidential.If there is a need and its possible to provide financial help to the progeny come forward, otherwise its better to maintain silence.The retired life is to enjoy after working throughout the life and remember the Almighty. Keep on donating, giving alms and helping one in distress & social work. 
(10). नाती, पोते प्रेम-प्यार, लाड़दुलार के हकदार हैं, मगर यदि उनके माता-पिता उन्हें डाँटते-फटकारते, समझाते हैं, तो कदापि बीच में न बोलें, हस्तक्षेप न करें। उन्हें बाद में समझाया, विचार-विमर्श करने को कहा जा सकता है।
Grand children deserve love-affection & sympathy but one should never interrupt-intervene when their parents are rebuking them. However, the parents may be given suggestions later when they are free-at peace and grand children may be asked to mend their behaviour or counselled.
Never interfere of interrupt in other's affairs.
अपनी लड़की या लड़के की जिन्दगी में झाँकने का प्रयास कभी न करें। आपको पता भी नहीं होगा कि उसने कब, कैसे, क्यों, कहाँ, किसलिये अनुचित-बुरी आदतें ग्रहण की थीं। 
One should never poke his nose in his daughter's married life. He would never know when, where, how his daughter or the son acquired vices, bad habits.
सीख वाको दीजिये जाको सीख सुहाए; सीख न दीजिये वानरा, घर बया को जाये। 
Preach one who is ready-willing to listen to you. Never guide-advise unwanted-undesired otherwise be ready to be thrown out.
(11). Your progeny is calling to abroad due to the birth of a child. Its very costly to maintain servants abroad. Carry money for emergency, but avoid making purchases. Be ready to return any moment. The daughter in law may not let you to watch TV & behave with you as slaves. You will miss Indians films, songs, TV programmes-shows there. You are going to be isolated from the society main land-mother land till you stay there. If your son is a puppet in his wife's hands then only the God can save you. Servants get better treatment there as compared to the parents. 
अगर आपका बेटा आपको अपने नवजात शिशु की देखभाल के लिए बुला रहा है तो जाना तो पड़ेगा ही मगर मानसिक रूप से तैयार होकर जाइये। वहाँ मान-सम्मान, इज्जत की अपेक्षा ने करें। टीवी देखने-सुनने की आजादी वहाँ नहीं मिलेगी; अगर नियंत्रण बहु के हाथ में है जैसा कि अक्सर-अमूमन होता है।  वो आपके लड़के को नाम लेकर बुलाती है जैसा कि आजकल अक्सर होता है तो शांत बने रहिये। हो सकता है वो आपको भी नाम से बुलाने लगे। वहाँ भारतीय फ़िल्में, टीवी देखने को शयद ही मिले, यह सुविधा केवल बहु के माँ-बाप के लिये ही है। अगर आपका बेटा पत्नी के हाथों की कठपुतली है तो भगवान् ही मालिक है। वहाँ नौकरों के साथ माता-पिता की अपेक्षा अच्छा व्यवहार किया जाता है। 
You may not get the food, fruits, sweets which you ate at home. You may not be able to drive a car.
इस बात की पूरी संभावना है कि आपको अपना मनपसन्द खाना, सब्जियाँ, दाल, मिठाईयाँ, पकवान, फल खाने को न मिलें।
Don't be angry or annoyed if hands are not washed-cleaned prior to cooking or serving food.
नाराज़ मत होने, देख कर नजरंदाज कर देना यदि खाना बनाते, परोसते वक्त गंदे हाथों को धोया ही नहीं गया। 
Avoid if you find that the sanitiser  is just applied on the hands instead of washing them, since its almost banned in all banks while counting currency notes. 
अगर यह देखो कि हाथ साबुन से अच्छी तरह माँजने की बजाय केवल सेनिटाइजर लगा लिया गया है तो नाराज मत होना, क्योंकि भारत में तो बैंकों में इसका प्रयोग नोट गिनने में बैन कर दिया गया है। 
One becomes happy when he plays with his grandson and his happiness enhances when his son takes him to parks, temples, big cities for sight seeing religious ceremonies almost every Saturday and Sunday in spite of his busy schedule.
पोते की हरकतों को देखकर ख़ुशी होगी जो कि उस वक्त और बढ़ जाएगी जब बेटा पार्कों, मंदिरों या बड़े शहरों में घूमाने ले जायेगा। 

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