Thursday, February 9, 2017

REINCARNATION-REBIRTH पुनर्जन्म [KARM (4) कर्म ]

KARM (4) कर्म 
REINCARNATION-REBIRTH पुनर्जन्म 
CONCEPTS & EXTRACTS IN HINDUISM By :: Pt. Santosh Bhardwaj  
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परिवादात्खरो भवति श्र्वा वै भवति निन्दक:। 
परिभोक्ता कृमिर्भवति कीटो भवति मत्सरी॥मनु स्मृति 2.201॥
गुरु का उपहास करने वाला मरने पर गधा, निन्दा करने से कुत्ता, उसकी सम्पति का भोग करने से कृमि और ईर्ष्या करने से कीड़ा होता है। 
One who makes fun of his teacher becomes an ass, on censuring-defaming he becomes a dog, on using his property a worm and on envying becomes an insect in next incarnation.
ब्राह्मण का हत्यारा ब्रह्म राक्षस बनता है। 
मन्दिर में पूजा-पाठ सवेतन करने वाला, मन्दिर के दान-धर्म में घपला करने वाला कुत्ता बनता है। 
Neglecting parents is a great sin. Those who neglect, tease, torture their parents eventually go the hells. Those who murder their parents too get worst possible hells and on their release from the hells; they have to spend millions of years in the form of various worms, insects and ultimately they become trees, shrubs etc.
उपासने ये गृहस्था: परपाकमबुद्धय:। तेन ते प्रेत्य पशुतां व्रजन्त्यन्नादिदायिनाम्मनु स्मृति 3.104
जो गृहस्थ अज्ञान वश दूसरे का अन्न खाते फिरते हैं, वे दोष से जन्मान्तर में अन्नदाताओं के पशु होते हैं। 
The ignorant house hold who venture eating food of others, get rebirth as animals of those who fed them.
केतितस्यु यथान्यायं हव्यकव्ये द्विजोत्तमः। कथञ्चिदप्यतिक्रामन् पापः सूकरतां व्रजेत्मनु स्मृति 3.190
देवकर्म या पितृकर्म में निमन्त्रित ब्राह्मण निमन्त्रण स्वीकार करके किसी कारण से यदि भोजन न करे तो उस पाप के कारण वह जन्मान्तर में सूअर होता है। 
If the Brahmn fails to turn up for accepting the sacred food for the purpose of offerings to the Manes, deities or the demigods due to one or the other reason he will be subjected to became a pig-hog in next birth by virtue of this sin.
व्यभिचारात्तु भर्तुः स्त्री लोकेप्राप्नोति निन्द्यताम्। शृगालयोनिं प्राप्नोति पापरोगैश्च पीड्यतेमनु स्मृति 5.164
पर पुरुष के साथ व्यभिचार करने से स्त्री संसार में निन्दित समझी जाती है और मरने के बाद शृगाल (गीदड़ी) होती है तथा कुष्ठादि रोगों से पीड़ित होती है। The who is involved in sex with the other man is disgraced in the world and become a jackal in next birth and suffers from diseases like leprosy in the current birth. 
She may have venereal-sexually transmitted diseases, AIDS, HIV etc.There is no one to look after her in old age and she gets a painful death.
शरीरजैः कर्मदोषैर्याति स्थावरतां नरः। वाचिकैः पक्षिमृगतां मानसैरन्त्यजातिताम्
जो मनुष्य शरीर से चोरी, पर स्त्री गमन, श्रेष्ठों को मारने आदि दुष्ट कर्म करता है, उसको वृक्ष आदि स्थावर योनियों में मिलता है। वाणी से किये गये पाप कर्मों के फलस्वरूप पक्षी और मृग आदि तथा मन से किये दुष्ट कर्मों के कारण उसे चाण्डाल आदि का शरीर प्राप्त होता है।
हर गुर निंदक दादुर होई; जन्म सहस्र पाव तन सोई। 
द्विज निंदक बहु नरक भोग करि; जग जनमइ बायस सरीर धरि॥[रामचरित मानस]
भगवान् शंकर और गुरु की निंदा करने वाला मनुष्य अगले जन्म में मेंढक होता है और वह हजार जन्म तक वही मेंढक का शरीर पाता है। ब्राह्मणों की निंदा करने वाला व्यक्ति बहुत से नरक भोगकर फिर जगत्‌ में कौए का शरीर धारण करके जन्म लेता है। 
सुर श्रुति निंदक जे अभिमानी; रौरव नरक परहिं ते प्रानी। 
होहिं उलूक संत निंदा रत, मोह निसा प्रिय ग्यान भानु गत॥[रामचरित मानस]
जो अभिमानी जीव देवताओं और वेदों की निंदा करते हैं, वे रौरव नरक में पड़ते हैं। संतों की निंदा में लगे हुए लोग उल्लू होते हैं, जिन्हें मोह रूपी रात्रि प्रिय होती है और ज्ञान रूपी सूर्य जिनके लिए बीत गया (अस्त हो गया) रहता है। 
सब कै निंदा जे जड़ करहीं; ते चमगादुर होइ अवतरहीं। 
सुनहु तात अब मानस रोगा; जिन्ह ते दुख पावहिं सब लोगा॥[रामचरित मानस]
जो मूर्ख मनुष्य सब की निंदा करते हैं, वे चमगादड़ होकर जन्म लेते हैं। हे तात! अब मानस रोग सुनिए, जिनसे सब लोग दुःख पाया करते हैं। 

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