Sunday, February 12, 2017

OCCUPYING NEW HOUSE गृह प्रवेश

OCCUPYING NEW HOUSE 
गृह प्रवेश 
 CONCEPTS & EXTRACTS IN HINDUISM 
By :: Pt. Santosh Bhardwaj
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गृह प्रवेश तीन प्रकार से होता है। गृह प्रवेश पूजा से घर में सुख-शांति बनी रहती है।
अपूर्व गृह प्रवेश :– जब पहली बार बनाये गये नये घर में प्रवेश किया जाता है तो वह अपूर्व ग्रह प्रवेश कहलाता है।
सपूर्व गृह प्रवेश: – जब किसी कारण से व्यक्ति अपने परिवार सहित प्रवास पर होता है और अपने घर को कुछ समय के लिये खाली छोड़ देते हैं तब दुबारा वहाँ रहने के लिये जब जाया जाता है तो उसे सपूर्व गृह प्रवेश कहा जाता है।
नए गृह में प्रवेश की विधिद्वान्धव गृह प्रवेश :– जब किसी परेशानी या किसी आपदा के चलते घर को छोड़ना पड़ता है और कुछ समय पश्चात दोबारा उस घर में प्रवेश किया जाता है तो वह द्वान्धव गृह प्रवेश कहलाता है।
गृह प्रवेश की पूजा विधि
सबसे पहले गृह प्रवेश के लिये दिन, तिथि, वार एवं नक्षत्र को ध्यान मे रखते हुए, गृह प्रवेश की तिथि और समय का निर्धारण किया जाता है। गृह प्रवेश के लिये शुभ मुहूर्त का ध्यान जरुर रखें। इस सब के लिये एक विद्वान ब्राह्मण की सहायता ली जाती है, जो विधिपूर्वक मंत्रोच्चारण कर गृह प्रवेश की पूजा को संपूर्ण करता है।
समय-मुहूर्त :: माघ, फाल्गुन, वैशाख, ज्येष्ठ माह को गृह प्रवेश के लिये सबसे सही समय बताया गया है। आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, आश्विन, पौष इसके लिहाज से शुभ नहीं माने गए हैं। मंगलवार के दिन भी गृह प्रवेश नहीं किया जाता विशेष परिस्थितियों में रविवार और शनिवार के दिन भी गृह प्रवेश वर्जित माना गाया है। सप्ताह के बाकि दिनों में से किसी भी दिन गृह प्रवेश किया जा सकता है। अमावस्या व पूर्णिमा को छोड़कर शुक्लपक्ष 2, 3, 5, 7, 10, 11, 12, और 13 तिथियां प्रवेश के लिये बहुत शुभ मानी जाती हैं।
पूजन सामग्री :- कलश, नारियल, शुद्ध जल, कुमकुम, चावल, अबीर, गुलाल, धूपबत्ती, पांच शुभ मांगलिक वस्तुएं, बंदनवार-आम या अशोक के पत्ते, पीली हल्दी, गुड़, चावल, दूध आदि।
गृह प्रवेश विधि :: पूजा विधि संपन्न होने के बाद मंगल कलश के साथ सूर्य की रोशनी में नए घर में प्रवेश करना चाहिए।
घर को बंदनवार, रंगोली, फूलों से सजाना चाहिए। मंगल कलश में शुद्ध जल भरकर उसमें आम या अशोक के आठ पत्तों के बीच नारियल रखें। कलश व नारियल पर कुमकुम से स्वस्तिक का चिन्ह बनाएं। नए घर में प्रवेश के समय घर के स्वामी और स्वामिनी को पांच मांगलिक वस्तुएं नारियल, पीली हल्दी, गुड़, चावल, दूध अपने साथ लेकर नए घर में प्रवेश करना चाहिए। श्री गणेश जी की मूर्ति, दक्षिणावर्ती शंख, श्री यंत्र को गृह प्रवेश वाले दिन घर में ले जाना चाहिए। मंगल गीतों के साथ नए घर में प्रवेश करना चाहिए। पुरुष पहले दाहिना पैर तथा स्त्री बांया पैर बढ़ा कर नए घर में प्रवेश करें। इसके बाद गणेश जी का ध्यान करते हुए गणेश जी के मंत्रों के साथ घर के ईशान कोण (North-East) में या फिर पूजा घर में कलश की स्थापना करें। इसके बाद रसोई घर में भी पूजा करनी चाहिये। चूल्हे, पानी रखने के स्थान और स्टोर आदि में धूप, दीपक के साथ कुमकुम, हल्दी, चावल आदि से पूजन कर स्वास्तिक चिन्ह बनाना चाहिये। रसोई में पहले दिन गुड़ व हरी सब्जियां रखना शुभ माना जाता है। चूल्हे को जलाकर सबसे पहले उस पर दूध उफानना चाहिये, मिष्ठान बनाकर उसका भोग लगाना चाहिये। घर में बने भोजन से सबसे पहले भगवान को भोग लगायें। गौ माता, कौआ, कुत्ता, चींटी आदि के निमित्त भोजन निकाल कर रखें। इसके बाद ब्राह्मण को भोजन करायें या फिर किसी गरीब भूखे आदमी को भोजन करा दें। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सुख, शांति व समृद्धि आती है व हर प्रकार के दोष दूर हो जाते हैं।
कलश स्थापना :- कलश के साथ घर में प्रवेश के बाद गणपति के ध्यान और गणेश मंत्रों के साथ घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा जहां मिलती हैं) में या घर के मंदिर में स्थापित कर दे। कलश को थोड़े चावल रखकर उन स्थापित करना चाहिए।
रसोई की पूजा :- रसोई में गैस चूल्हा, पानी रखने के स्थान और भंडार घर की जगह धूप, दीपक के साथ कुमकुम, हल्दी, चावल आदि से पूजन कर स्वस्तिक चिन्ह बना देने चाहिए। पहले दिन रसोई में गुड़ व हरी सब्जी रखना चाहिए। चूल्हे पर दूध उफानना चाहिए। कोई मिठाई बनाकर उसका भोग लगाना चाहिए। हलुआ या लापसी बनाई जा सकती है। घर में बनाया भोजन सबसे पहले भगवान को भोग लगाएं। गौ माता, कौआ, कुत्ता, चींटी आदि के निमित्त भोजन निकाल कर रखें। पहले दिन अपने परिवार, मित्रों के साथ ब्राह्मण भोजन कराएं। अगर संभव ना हो तो एक ब्राह्मण को भोजन करा दें।
किसी का भी नए घर में प्रवेश बहुत मायने रखता है। हिंदू धर्म में किसी नए घर में प्रवेश करने के लिए पूजा की जाती है जिसे गृहप्रवेश कहते हैं। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि घर से सभी बुरी शक्तियों का खात्मा हो जाए। इस पूजा की अपनी ही एक अहमियत जिसे लोग आज भी मानते हैं। लेकिन गृहप्रवेश के लिए आपको कुछ चीजों के बारे में ध्यान रखने की जरूरत है ताकि आप नए घर में शांति से रह सकें।
सामान्य प्रक्रिया :: गृह प्रवेश की पूजा के बाद उस रात परिवार को उसी घर में सोना चाहिए। वास्तु पूजा  के बाद घर के मालिक को पूरे भवन का एक चक्कर काटना चाहिए। गृह स्वामिनी को पानी से भरे कलश को लेकर पूरे घर में घूमना चाहिए और जगह-जगह पर फूल गिराने चाहिए। गृह प्रवेश वाले दिन एक कलश में पानी या दूध भरकर रखें और अगले दिन उसे मंदिर में चढ़ा दें। गृह प्रवेश वाले दिन घर में दूध उबालना शुभ होता है। गृह प्रवेश के 40 दिन तक घर खाली नहीं होना चाहिए चाहे एक ही सदस्य रहे लेकिन उस घर में किसी न किसी का होना बहुत जरूरी होता है। नए मकान में प्रवेश करने से पहले रंगाई-पुताई करवाकर पानी के सभी नल, बिजली के कनेक्शन आदि की अच्छी तरह से जांच कर लेनी चाहिए।
शुभ मुहूर्त में, मकान का फर्श साफ -सुथरा करके यज्ञ, हवन, पूजन, दीप, धूप आदि द्वारा विधि-विधान से गृह प्रवेश पूजन सम्पन्न करना चाहिए। घर में प्रवेश करने से पहले बड़े-बुजुर्ग, पूजनीय, पित्रों (इष्ट) का आशीर्वाद लें तथा भोजन कराना चाहिए। ऐसा करने से सबके मन में सकारात्मक प्रभाव आता है और उनकी सकारात्मक शक्ति आपको जीवन में आगे बढ़ने का हौसला देती है। रोजाना घर में फिटकरी के पानी से पोछा लगाना भी बेहद लाभकारी माना जाता है। घर में वास्तु दोष निवारक यंत्र (शंख, घण्टा ध्वनि) अवश्य रखें इससे अगर घर की बनावट में किसी तरह की परेशानी होगी तो दूर होगी। हिंदु धर्म और संस्कृति में प्राचीन काल से ही वास्तु देवता की प्रसन्नता के लिए उनकी पूजा का विशिष्ट स्थान रहा है। चाहे नगर निर्माण हो या भवन निर्माण अथवा कर्मकांड के लघु एवं बृहत यज्ञानुष्ठान आदि हों, इन सभी कार्यों में सफलता में आने वाली बाधाओं के शमन के लिए वास्तु पुरुष की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। ऐसी स्थिति में संपूर्ण वास्तुयंत्र को अपने घर में स्थापित करने से वास्तु देवता प्रसन्न होते हैं जिससे घर की सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
हवन :: निम्न मन्त्रों के द्वारा हवन सम्पन्न करें 
शुद्धि मंत्र :: 
ॐ अपवित्र: पवित्रो वा सर्वाव स्थान्गतो अपि वा। य: स्मरेत  पुंडरीकाक्षं स वा ह्यभ्यन्तर: शुचि:॥   

ॐ गं गणपत्ये नम:। 


आहुति के लिये :: 

ॐ गं गणपत्ये नम:। 

वन्दना :: 
ॐ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटिसम्स्प्रभः। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

ग्रह शान्ति :: 
(1). ब्रह्मा मुरारी त्रिपुरांतकारी भानु शशि भूमिसुतो बुधश्च गुरुश्च
 शुक्र: शनि राहु केतव:, सर्वे ग्रहा शान्ति करा भवन्तु।

(2). ॐ द्धयो: शांति अंतरिक्ष शांति पृथिवी शांति आपः शांति औषधय: शांति वनस्पतय: शांति विश्र्वेदेवा शांति सर्व शांति शांतिरेव शांति सामा शांति शान्तिरेधि: विश्र्वानि देव सवितुर्दुरितानि परासुव। यद् भद्रं तन्न आसुव।
 ॥ ॐ शांति: शांति: शांति: ॐ॥  
आरती करें ::  
(2). आरती श्री जगदीश जी
ओउम् 
जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनन  के संकट, क्षण  में दूर करे॥
 जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का। सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे  तन का॥

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी। 
तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ 
तुम पूरण परमात्मा, तुम अंतर्यामी। पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सब के स्वामी॥

 तुम करुणा के सागर, तुम पालन कर्ता। 
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ 
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति। किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥ 
दीनबन्धु दुःखहर्ता, तुम रक्षक मेरे। अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा मैं तेरे॥ 
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा। श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा॥
  

तन-मन-धन सब है तेरा, स्वामी सब कुछ है तेरा। 
तेरा तुझको अर्पण, क्या लागे मेरा॥
 श्री जगदीश जी की आरती, जो कोई नर गावे। कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावे॥ 


ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे;  भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे।
  ॐ जय जगदीश…
जो ध्यावे फल पावे, दुःख बिनसे मन का; सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का
 ॐ जय जगदीश…
मात पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी; तुम बिन और न दूजा, आस करूं मैं जिसकी। 
ॐ जय जगदीश…
तुम पूरण परमात्मा, तुम अंतरयामी; पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सब के स्वामी। 
ॐ जय जगदीश…
तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता;  मैं सेवक तुम स्वामी, कृपा करो भर्ता। 
ॐ जय जगदीश…
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति;  किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति। 
ॐ जय जगदीश…
दीन बंधु दुखहर्ता, तुम रक्षक मेरे; करुणा हाथ बढ़ाओ, द्वार पड़ा तेरे। 
ॐ जय जगदीश…
विषय विकार मिटाओ, पाप हरो देवा; श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा। 
ॐ जय जगदीश…
(2). आरती श्री हनुमान जी 
आरती कीजे हनुमान लला की।दुष्टदलन रघुनाथ कला की ॥
 जाके बल से गिरिवर कापै।रोग-दोष जाके निकट न झांपे॥
 अंजनी पुत्र महा बलदाई। संतन के प्रभु सदा सुहाई॥ 
दे बीरा हनुमान पठाये।लंका जारि सिया सुध लाये॥ 
लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात  पवन सुत बार न लाई॥
 लंका जारि असुर संहारे। सियारामजी के काज संवारे॥
 लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आनि संजीवन प्राण उबारे॥
 पैठी पाताल तोरि जम-कारे। अहिरावन के भुजा उखारे॥
 बायें भुजा असुर दल मारे।दाहिने भजा संतजन तारे॥ 
सुर नर मुनि आरती उतारें। जय जय जय हनुमान उचारें॥ 



कंचन थार कपूर लौ छाई।
आरती करत अंजना माई॥

 जो हनुमान जी की आरती गावै।बसी बैकुंठ परमपद पावै॥ 
आरती कीजै हनुमान लला की।दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥ 
॥ जय बजरंगबली॥ 

(3). माँ लक्ष्मी जी की आरती



ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता; तुमको निशदिन सेवत, हर विष्णु विधाता। 

 जय ब्रह्माणी रूद्राणी कमला, तू हि है जगमाता; सूर्य चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता। 

जय दुर्गा रूप निरंजन, सुख सम्पति दाता; जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि सिद्धि धन पाता। 

जय तू ही है पाताल बसन्ती, तू ही है शुभ दाता; कर्म प्रभाव प्रकाशक, भवनिधि से त्राता। 

जय जिस घर थारो वासो, तेहि में गुण आता। कर न सके सोई कर ले, मन नहिं धड़काता। 

जय तुम बिन यज्ञ न होवे, वस्त्र न कोई पाता; खान पान को वैभव, सब तुमसे आता। 

जय शुभ गुण सुंदर मुक्त्ता, क्षीर निधि जाता; रत्त्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नही पाता। 

 जय आरती लक्ष्मी जी की, जो कोई नर गाता; उर आनन्द अति उपजे, पाप उतर जाता। 

जय स्थिर चर जगत बचावे, शुभ कर्म नर लाता, मैया तेरा भक्त निरन्तर शुभ दृष्टि चाहता। 

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता; तुमको निश दिन सेवत, हर विष्णु विधाता। 
श्री गायत्री यंत्र :: गायत्री यंत्र के पूजन, दर्शन से घर में सात्विक वातावरण बनता है जिससे घर के सभी सदस्यों में पवित्र भावना का विकास होता है। 
महा मृत्युंजय यंत्र :: इस यंत्र के दर्शन, पूजन से घर में दुःख, बीमारियों से रक्षा होती है, व्यक्ति उन्नति की ओर अग्रसर होता है।
श्री काली यंत्र :: महाकाली यंत्र के दर्शन, पूजन से अकाल मृत्यु से रक्षा होती है। आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। 
श्री वास्तु महायंत्र :: इस यंत्र के दर्शन, पूजन से घर में वास्तुदोष का निवारण होता है। घर की सुरक्षा बनी रहती है।
Image result for श्री शनि यंत्रश्री केतु यंत्र :: केतु यंत्र के दर्शन, पूजन से अचानक होने वाली अशुभ घटनाओं का पूर्वाभास होता है। व्यक्ति सावधानीपूर्वक विकट स्थितियों का सामना करने में सफल होता है।
श्री राहु यंत्र :: इस यंत्र के दर्शन, पूजन से कार्यों में आने वाली अड़चनें दूर होती हैं। सामान्य संघर्ष के बाद व्यक्ति सफलता प्राप्त करता है।

श्री शनि यंत्र :: शनि यंत्र के पूजन, दर्शन से हीन भावनाओं का नाश होता है। व्यक्ति स्थिरतापूर्वक कार्यक्षेत्र में सफल होता है।
श्री मंगल यंत्र :: मंगल यंत्र के पूजन, दर्शन से धैर्य एवं साहस में वृद्धि होती है जिससे व्यक्ति निडर होकर कार्य करता है।
श्री कुबेर यंत्र :: कुबेर यंत्र के पूजन, दर्शन से आय के स्रोतों में वृद्धि होती है। धन का सदुपयोग होता है।

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