Saturday, June 4, 2016

‎THUMB-अँगूठा

THUMB-अँगूठा 
CONCEPTS & EXTRACTS IN HINDUISM By :: Pt. Santosh Bhardwaj  
santoshhastrekhashastr.wordpress.com
santoshkipathshala.blogspot.com     santoshsuvichar.blogspot.com    santoshkathasagar.blogspot.com   bhartiyshiksha.blogspot.com   hindutv.wordpress.com    bhagwatkathamrat.wordpress.com    
अनादि सत्य सिद्ध ग्रंथों-वेद, उपनिषद, पुराण अादि में जहाँ कहीं भी आत्मा के स्वरूप या फिर परमतत्व परमब्रह्म परमेश्वर परमात्मा का निरूपण किया गया है, उसके स्वरूप की तुलना अँगूठे से की गई है। 
The eternal scriptures Veds, Upnishads and the Purans have configured the Almighty like the Thumb.
The soul present in the body of an organism acquires the shape and size of the human thumb once its released from the body.
वराहतोको निरगादंगुष्ठ परिमाणक:। दृष्टोSंगुष्ठ शिरोमात्र: क्षणाद्गण्डशिलासम: 
[श्रीमद्भागवत महापुराण 3.13.18]
ब्रह्मा जी के नासिका छिद्र से अकस्मात अँगूठे के बराबर आकार का वराह शिशु निकला और अँगूठे के पेरूए के बराबर दिखने वाला वह प्राणी-वराह, क्षण भर में पर्वत के समान विस्तृत हो गया। 
A small boar-hog equal to the size of the thumb came out of the nasal cavity of Brahma Ji -the creator, spontaneously and took the shape of a mountain at once.
अंगुष्ठमात्रो रवितुल्यरूप, संकल्पाहंकार समन्वितो यः। 
बुद्धेर्गुणेनात्मगुणेन  चैव,आराग्रमात्रो ह्यपरोSपि दृष्टः॥[श्वेताश्वतरोपनिषद् 5.8]   
जो अँगुष्ठ मात्र परिमाण वाला, रवितुल्य-सूर्य के समान प्रकाश वाला तथा संकल्प और अहंकार से युक्त है, बुद्धि के गुण के कारण और अपने गुण के कारण ही सूजे की नोक के जैसे सूक्ष्म आकार वाला है; ऐसा अपर-अर्थात परमात्मा से भिन्न जीवात्मा भी निःसन्देह ज्ञानियों के द्वारा देखा गया है। 
The Almighty-God similar in shape & size to the thumb, brilliant like the Sun, associated with firmness-determination & possessiveness, due to his own characterises and the intelligence, small & sharp just like the tip of a needle was in deed seen-visualised-observed-conceived by the learned-enlightened-scholars.
अंगुष्ठमात्र: पुरुषो, मध्ये आत्मनि तिष्ठति। ईशानो भूतभव्यस्य न तेता विजुगुप्सते॥ 
[कठोपनिषद् 2.1.13] 
अंगुष्ठमात्र परिमाण वाला, परम पुरुष-परमात्मा, शरीर के मध्य भाग अर्थात हृदयाकाश में स्थित है, जो कि भूत, भविष्य और वर्तमान का शासन करने वाला है। उसे जान लेने के बाद वह जिज्ञासु-मनुष्य किसी की निन्दा नहीं करता। यही वह परमतत्व है।  
The Almighty comparable to thumb in shape and size is present in the middle segment of the body and visualises the past, present and the future. Once a man knows Him, never censure others.
निन्दा :: तिरस्कार, आक्षेप, प्रत्याख्यान, भंडाफोड़, पर्दाफ़ाश, मलामत, झिड़की, गुण-दोष की व्याख्या, प्रतिवाद, विरोध, नापसंदगी, बदनामी, कलंक, अपवाद, ग्लानि की भावना, अपमान, दोष, भंडाफोड़, धमकी, परछाई, परावर्तन, भावना, प्रतिबिंब, सोच, फटकार, मुंहतोड़ जवाब, सामना, फटकार, परावर्तन, विचार, ध्यान, फटकार, डांट-डपट, शाप, आलोचना, टीका-टिप्पणी, दोष-विवेचन, चुगली, अनुचितता, घृणोत्पादकता, वीभत्सता, रोमांचकारिता, कठोर समालोचना, विवाद, अप्रतिष्ठा, बुराई, निर्घोष, विस्फोट, दोषारोपण, अभियोग में फॉंसना या लपेटना, बदनामी, आक्रोश, अभिशाप, अपयश, अपकीर्ति; opprobrium, condemnation, censure, denunciation, twit, stricture, deprecation, scandal, blame, denouncement, re-flexion, reproof, letdown, objurgation, talking to, decrial, tarnation, reflection, dispraise, dressing down, telling-off, animadversion, backbiting, shocking, diatribe, disparagement, fulmination, malediction. 
ईशानो भूत भव्यस्य स एवाद्य स उ श्वः। 
भूत, भविष्य तथा वर्तमान पर शासन करने वाला वह परमात्म परमतत्त्व जैसा आज है, वैसा ही कल भी रहेगा। The Almighty who rules the present, past and the future will remain as such always & for ever.

No comments:

Post a Comment