Tuesday, January 5, 2016

PRAYER RULES पूजा विधान ::

PRAYER RULES पूजा विधान   
CONCEPTS & EXTRACTS IN HINDUISM By :: Pt. Santosh Bhardwaj
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सुखी और समृद्धिशाली जीवन के लिए देवी-देवताओं के पूजन की परंपरा आदि काल से चली आ रही है। अधिकांश हिन्दु  में लोग इस परंपरा को निभाते हैं। पूजन से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। पूजन का शुभ फल पूर्ण रूप से प्राप्त करने हेतु पूजा करते समय शास्त्र में वर्णित कुछ सावधानियाँ-नियमों का पालन भी किया जाना चाहिए।  
कभी भी दीपक से दीपक नहीं जलाना चाहिए। जो व्यक्ति दीपक से दीपक जलाते हैं, वे रोगी होते हैं।
बुधवार और रविवार को पीपल के वृक्ष में जल अर्पित नहीं करना चाहिए।
पूजा हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख रखकर करनी चाहिए। यदि संभव हो सके तो सुबह 6 से 8 बजे के बीच में पूजा अवश्य करें।
पूजा के लिए आसन रुरु मृग चरम, चीते की खाल, मृग चर्म, मूँज की चटाई या फिर ऊनी हो।
घर के मंदिर में सुबह एवं शाम एक दीपक घी का और एक दीपक तेल का जलाना चाहिए।
पूजन-कर्म और आरती पूर्ण होने के बाद उसी स्थान पर खड़े होकर 3 परिक्रमाएँ अवश्य करनी चाहिए।
रविवार, एकादशी, द्वादशी, संक्रान्ति तथा संध्या काल में तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ना चाहिए। मासिक धर्म की स्थिति में महिलायें तुलसी से दूर ही रहें। 
भगवान् की आरती करते समय भगवान् के श्री चरणों की चार बार आरती करें, नाभि की दो बार और मुख की एक या तीन बार आरती करें। इस प्रकार भगवान् के समस्त अंगों की कम से कम सात बार आरती करनी चाहिए।
पूजाघर में मूर्तियाँ 1, 3, 5, 7, 9, 11 इंच तक की होनी चाहियें। इससे बड़ी नहीं तथा खड़े हुए गणेश जी, माता सरस्वती, माता लक्ष्मी की मूर्तियाँ घर में नहीं होनी चाहिए।
गणेश जी या देवी की प्रतिमा तीन-तीन, शिवलिंग दो, शालिग्राम दो, सूर्य प्रतिमा दो, गोमती चक्र दो की सँख्या में कदापि न रखें।
मंदिर में सिर्फ प्रतिष्ठित मूर्ति ही रखें। उपहार, काँच, लकड़ी एवं फायबर की मूर्तियाँ न रखें एवं खण्डित, जली-कटी-फ़टी  फोटो और टूटा काँच तुरंत हटा दें। खंडित मूर्तियों की पूजा वर्जित की गई हैं। जो भी मूर्ति खंडित हो जाती है, उसे पूजा के स्थल से हटा देना चाहिए और किसी पवित्र बहती नदी में प्रवाहित कर देना चाहिए। खंडित मूर्तियों की पूजा अशुभ मानी गई है। 
मंदिर के ऊपर भगवान के वस्त्र, पुस्तकें एवं आभूषण आदि भी न रखें मंदिर में पर्दा अति आवश्यक है।  अपने पूज्य माता–पिता तथा पित्रों का फोटो मंदिर में कदापि न रखें। उन्हें घर के नैऋत्य कोण में स्थापित करें।
भगवान् विष्णु की चार, गणेश जी की तीन, सूर्य की सात, माता भगवती दुर्गा की एक एवं भगवान् शिव की आधी परिक्रमा कर सकते हैं।

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