Friday, May 29, 2015

SLAYING BRAHMN ब्राह्मण वध

SLAYING BRAHMAN ब्राह्मण वध

 CONCEPTS & EXTRACTS IN HINDUISM 
By :: Pt. Santosh Bhardwaj
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ब्राह्मण सम्पूर्ण पृथ्वी का स्वामी है। शुक्राचार्य को पृथ्वी का स्वामी माना जाता है। परशुराम जी ने 21 बार क्षत्रियों का विनाश करके धरती ब्राह्मणों को प्रदान की; परन्तु ब्राह्मणों ने भूमि पुनः-पुनः क्षत्रियो को दे दी। क्षत्रिय या शासक ब्राह्मण के प्रतिनिधि के रूप में राज्य करता है। ब्राह्मणों को नाराज-नाखुश करके शासक अपना सर्वनाश कर लेता है।ब्राह्मण किसी का नहीं खाता। दान देना और लेना उसका हक-अधिकार है। 
Brahmn own this earth. He is the master of this universe and he has given this earth to the Kshatriy to manage-rule-maintain law and order on his behalf. Shukrachary is master of this earth. Bhagwan Shri Parshu Ram Ji eliminated the Kshatriys 21 times, due to the arrogance-atrocities they inflicted over the Brahmns. Brahmns repeatedly granted this earth to the Kshatriys to rule. One who displease-angers the Brahmn digs his own grave.
पतित ब्राह्मण का भी वध नहीं करना चाहिए और आताताइयों को मार ही डालना चाहिए। [श्री मद्  भागवत 1.7.53]
One must not kill-murder the scholars, Brahmns-Pandits, philosophers, but kill the invaders, intruders, attackers, terrorists, those who poison, fire the houses, snatch the earnings-property-wealth-belongings, farms and the women folk and the one who possess the weapons with bad-ulterior intentions-motives.
आताताई: आग लगाने वाला, जहर देने वाला, बुरी नीयत से हाथ में शस्त्र ग्रहण करने वाला, धन लूटने वाला, खेत और स्त्री को छीनने वाला।  
मूँड़ देना, धन छीन लेना और स्थान से बाहर निकाल देना, यही ब्रह्मणाधमों  (अधम-नीच) का वध है, उनके लिए इसके अतिरिक्त शारीरिक वध का विधान नहीं है। [श्री मद् भागवत 1.7.58] 
Shaving of head, snatching the money-wealth-property-belongings, removing from state-region-country is equivalent to death-execution for the Brahmns. 
जो उच्छृंखल राजा अपने कुकृत्यों से ब्राह्मण कुल को कुपित कर देते हैं, वह कुपित ब्राह्मण कुल उन राजाओं को सपरिवार शोकाग्नि में डालकर शीघ्र ही भस्म कर देता है। [श्री मद्  भागवत 1.7.48] 
The unrestrained-uncontrolled king-ruler-emperor-politician, who vanish-torture-punish innocent Brahmns and anger them is wiped off from the earth along with his descendants-clan-hierarchy.
परशुराम जी ने 21 बार पृथ्वी को क्षत्रिय विहीन किया। चाणक्य ने नन्द कुल का नाश किया। वर्तमान काल में ब्राह्मणों का तिरस्कार-अपमान किया जा रहा है, जो कि नेताओं के लिए चेतावनी है!
Parshu Ram Ji wiped off the Kshtriy-marshal caste from the earth 21 times. Chanky vanished the Nand dynasty. The leaders-Netas-politicians who are insulting, torturing the Brahmns, depriving them off suitable jobs are bound to be doomed-marooned-destroyed for their irrational behaviour.
ब्राह्मण की हत्या एक जघन्य अपराध और पाप है। ऐसा करने वाले को ब्रह्म हत्या लग जाती है जो उसे नर्क यातना प्रदान करती है। देवराज इन्द्र को ब्रह्म ह्या लगने पर अपने पद से च्युत होना पड़ा और भयंकर कष्ट भोगने पड़े। Brahmn's murder is the worst possible sin and place the murderer in hells from where he is released after millions of years to become insect. Brahm Htya led Dev Raj Indr to remove him from his seat in the heaven and suffering.
ब्रह्महत्या :: पूर्व काल में वृत्रासुर और इन्द्र में 11,000  वर्ष तक युद्ध हुआ, जिसमें इन्द्र की हार हुई और वे भगवान् शिव के शरणागत हुए। इन्द्र को वरदान प्राप्त हुआ और उन्होंने प्रभु कृपा से, वृत्रासुर का वध किया, जो ब्राह्मण पुत्र था। इस लिये उन्हें ब्रह्म हत्या लग गई। वे ब्रह्मा जी की शरण में गये। ब्रह्महत्या ने इन्द्र के शरीर से हटने के लिये अन्य स्थान माँगा, तो उन्होंने उसे 4 भागों में बाँट दिया। 
पहला भाग अग्नि देव को मिला। जो कोई प्रज्वलित अग्नि में बीज, औषध, तिल, फल, मूल, समिधा और कुश  की आहुति नहीं डालेगा, ब्रह्महत्या अग्नि को छोड़ कर उसे लग जायेगी।
दूसरा भाग वृक्ष, औषध और तृण को मिला। जो कोई व्यक्ति मोह वश अकारण, इन्हें काटेगा या चीरेगा, ब्रह्म हत्या, इन्हें छोड़ कर उसे लग जायेगी।
तीसरा भाग अप्सराओं को मिला। जो कोई व्यक्ति रजस्वला स्त्री से मैथुन करेगा, यह तुरन्त उसे लग जायेगी।  
चौथा भाग जल ने गृहण किया। जो व्यक्ति अज्ञानवश जल में थूक, मल-मूत्र डालेगा, वही ब्रह्महत्या का निवास बन जायेगा। 
प्राचीन काल से ही कोई भी न्यायाधीश, इस भय से ब्राह्मण को प्राण दण्ड नहीं देता था। 
ब्राह्मणायावगुर्यैव द्विजातिर्वधकाम्यया। शतं वर्षाणि तामिस्रे नरके परिवर्तते॥मनु स्मृति 4.165॥
जो द्विजाति ब्राह्मण को मारने की इच्छा से क्रुद्ध होकर लाठी उठता है वह सौ वर्ष तक तामिस्त्र नामक नरक में चक्कर खता है। 
One who raise the staff-arms with the aim-desire of killing, striking a Brahmn has to stay-roam in deadliest-dreaded hell called Tamistr for 100 years.
 ताडयित्वा तृणेनापि संरम्भान्मतिपूर्वकम्। एकविंशतीमाजातीः पापयोनिषु जायते॥मनु स्मृति4.166॥
जो क्रोध में आकर ज्ञानतः एक तिनके से भी ब्राह्मण को मारता है, वह उस पाप के फल स्वरूप 21 बार पापयोनियों में अर्थात कुत्ता आदि नीच योनियों में जन्म लेता है। One who knowingly-intentionally strike a Brahmn even with a straw, with anger goes to inferior species like dogs for 21 rebirths 
अयुध्यमानस्योत्पाद्य ब्राह्मणस्यासृगङ्गतः। दुःखं सुमहदाप्नोति प्रेत्याप्राज्ञतया नरः॥मनु स्मृति4.167॥
जो कोई न लड़ने वाले ब्राह्मण के शरीर से लहू बहाता है, वह अपनी मूर्खता के कारण परलोक में कष्ट पाता है। The ignorant-idiot, who shed blood out of the body of a Brahmn who does fight, suffers in next births-other abodes.
शोणितं यावतः पांसून्संगृह्णाति महीतलात्। तावतोऽब्दानमुत्रान्यैः शोणितोत्पादकोऽद्यते॥मनु स्मृति4.168॥
ब्राह्मण का गिरा हुआ रक्त मिट्टी के जितने अणुओं को भिगोता है, उतने वर्ष परलोक में उस रक्त बहाने वाले को हिंस्त्र जीव काटते और कहते हैं। भिगोना 
One who shed the blood of a Brahmn, has to be bitten and eaten by the carnivorous animals in next births-abodes for as many years as the atoms-molecules of the earth were damped-soaked-wrapped by the Brahmn's blood.
गुरुं वा बालवृद्धौ वा ब्राह्मणं वा बहुश्रुतम्। आततायिनमायान्तं हन्यादेवाविचारयन्मनु स्मृति 8.350॥
गुरु, बालक, वृद्ध या बहुत शस्त्रों का जानने वाला ब्राह्मण भी आततायी होकर मारने के लिये आये तो उसे बेखटके मार डालें।
One must kill-slay without hesitation if a Guru, child, old man or a Brahmn who has learnt many scriptures come to kill-murder.
Bhagwan Shri Ram did not hesitate in killing Ravan who was a Brahmn by birth and one of the most learned man on earth with the knowledge of all scriptures including Ved and astrology. Achary Dron was killed by Dhrasht Dhyumn due to this reason only. Dev Raj too killed Vrata Sur a Brahmn by birth. Pandavs were sinned on this account as well. They all had to undergo penances for this act. Ashwatthama was pardoned by Dropadi being the son of Guru and a Brahmn. However being Ajar & Amar & an incarnation of Bhagwan Shiv he could not be killed. He killed Dropadi's sons over the orders of Bhagwan Shiv but he crossed the limits and targeted the Brahmastr over Abhimanyu's son in the womb.
न ब्राह्मणवधाद्भूयानधर्मो विद्यते भुवि। तस्मादस्य वधं राजा मनसाऽपि न चिन्तयेत्मनु स्मृति 8.381॥
ब्राह्मण के वध से बढ़कर संसार में दूसरा कोई पाप-अपराध नहीं है। इसलिये राजा उसके वध की चिंता कभी मन से न करे। 
यह नियम काम विकारों-अपराधों से सम्बन्धित है। कौरव वंश भगवान् वेद व्यास से ही कायम रहा और भगवान् श्री राम का रघुवंश भी महर्षि वशिष्ठ की कृपा से ही आगे बढ़ा। व्यवहार में बहुत लोग बच्चे पैदा करने में सक्षम नहीं होते। उनकी पत्नियाँ प्रताड़ना से बचने के लिए अन्यत्र प्रयास करती हैं। आज भी समाज में नियोग प्रथा कायम है। नियोग में ब्राह्मण या स्त्री की ओर से वासना का अंश नहीं होना चाहिये। पुरुष और विशेषतः ब्राह्मण को कभी भी आगे बढ़कर यह कार्य सम्पादन नहीं करना चाहिये। इस प्रकार की संतान का पिता सम्बन्धित स्त्री का पति हो होता है। 
It does not contradicts postulate मनु स्मृति 8.350. This postulate pertains to sexual offences-advances. Kaurav clan continued due to Bhagwan Ved Vyas and the Raghu Vansh continued due to Mahrishi Vashishth. In practice a large number of people are functionally impotent and are unable to produce children. In such situations the woman resort to sexual relations else where to protect them selves from the torture in the family. An ancient practice by the name of NIYOG still prevail in the Hindu society in which the woman mates with intellectual able bodied, pious, virtuous Brahmns with the permission of her husband and in laws. The progeny gets the title of its father only not the biological father. 
There is no sin as great as killing, slaying, murdering a Brahmn. Therefore the king never resort to killing a Brahmn.
Maha Nand killed Chanak-the father of Achary Chanaky and his empire was reduced to zero. Killing of Bhagwan Parshu Ram's father father led to the elimination of Kshtriy clans 21 times from the earth.
Dev Raj Indr-king of heaven, too was spared for killing Vrata Sur a Brahmn by birth. 
Bhagwan Ram himself took to penances for killing Ravan.
Pandavs too were made to undergo penances by Bhagwan Shri Krashn for killing Achary Dron.


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