Monday, August 12, 2013

TEARS OF BLISS प्रेमाश्रु-आनन्दाश्रु-आँसू

TEARS प्रेमाश्रु-आनन्दाश्रु-आँसू 
CONCEPTS & EXTRACTS IN HINDUISM By :: Pt. Santosh  Bhardwaj  
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नयनं गलदश्रुधारया वदनं गदगदरुद्धया गिरा।पुलकैर्निचितं वपुः कदा तव नाम-ग्रहणे भविष्यति॥6॥
हे प्रभु, कब आपका नाम लेने पर मेरी आँखों के आंसुओं से मेरा चेहरा भर जायेगा, कब मेरी वाणी हर्ष से अवरुद्ध हो जाएगी, कब मेरे शरीर के रोम खड़े हो जायेंगे। 
Oh the Almighty! When will the tears in eyes cover my face on reciting your name, when will my voice choke up and when will the hair of my body stand erect on reciting your name!?
युगायितं निमेषेणचक्षुषा प्रावृषायितम्।शून्यायितं जगत् सर्वंगोविन्द विरहेण मे॥7॥
श्रीकृष्ण के विरह में मेरे लिए एक क्षण एक युग के समान है, आँखों में जैसे वर्षा ऋतु आई हुई है और यह विश्व एक शून्य के समान है। 
Hey Shri Krashn! Separation for a moment looks like ages. Tears are flowing from my eyes like torrents of rain and all this world seems meaningless.
घमंडियों-आतातियों-अत्याचारियों-व्यभिचारियों  के अत्याचारों से सताये गये व्यक्ति की आँखों में आंसू आ ही जाए हैं, जिनसे उनका सर्वनाश-सत्यानाश हो जाता है। 
Photoबैठे-बैठे कभी-कभी अचानक भगवान का ध्यान आ जाता है, तो आँसू खुद-बखुद बहने लगते हैं; मगर वो उन्हें बखूबी छुपा जाता है। रोने से दिल हल्का हो जाता है। मन का गुबार-घुटन कम हो जाती है और व्यक्ति सामान्य हो जाता है। 
सरस्वती नदी के जल से पूरित बिन्दु सरोवर वह स्थान है, जहाँ अपने शरणागत कर्दम ऋषि के प्रति उत्पन्न हुई अत्यधिक करुणा से भगवान् के नेत्रों से अश्रु की कुछ बूँदें गिरी थीं। यह तीर्थ बड़ा पवित्र है। इसका जल कल्याण मय और अमृत के समान है। [श्री मद्भागवत ] 
ध्यान के अभ्यास से साधक का श्री हरी में प्रेम हो जाता है और उसका ह्रदय भक्ति से ओत प्रोत-तथा द्रवित हो जाता है। शरीर में आनन्दाश्रुओं, उत्कण्ठा जनित प्रेमाश्रुओं की धारा में वह बारम्बार अपने शरीर को नहलाता है और धीरे-धीरे अपने चित्त को भी ध्येय वस्तु से हटा लेता है। [श्री मद्भागवत 3-28-34]
परमात्मा का दर्शन करते ही ब्रह्मा जी का ह्रदय आनन्द के उद्रेक से लबालब भर गया। शरीर पुलकित हो उठा, नेत्रों में प्रेमाश्रु छलक आये। [श्री मद्भागवत 2-9-17]
जब धृतराष्ट्र की पुत्र वधु और महाराज युधिष्टर की पटरानी द्रौपदी के केश दुःशासन ने भरी सभा में खींचे तो द्रौपदी की आँखों से आँसुओं की धारा बह चली और उस प्रवाह से उसके वक्षस्थल पर लगा हुआ केसर भी बह चला; किन्तु धृतराष्ट्र ने अपने पुत्र को उस कुकर्म से रोका नहीं।  [श्री मद्भागवत 3-1-7] 
उद्धव जी श्री कृष्ण के चरणार विन्द-मकरन्द-सुधा से सराबोर होकर दो घड़ी तक कुछ भी बोल नहीं सके। तीव्र भक्तियोग से उसमें डूबकर वे आनन्दमग्न हो गये॥ 4॥ उनके सारे शरीर में रोमान्च हो आया तथा मुँदे हुए नेत्रों से प्रेम के आँसुओं की धारा बहने लगी। उद्धव जी को इस प्रकार प्रेम प्रवाह में डूबे हुए देखकर विदुर जी ने उन्हें कृतकृत्य माना। [श्री मद्भागवत 3-2-4,5]
Tears evolve automatically in the eyes of those who are teased-tortured-terrorized by the villains-wretched-cruel-barbarians-demonic-Shaitanic people. These tears are sufficient to destroy-perish-eliminate them. 
Tears start rolling out of one's eyes, when he start remembering the Almighty suddenly, due to his deep involvement in him, but he hides them from others. He feels light. The pain in him recedes and he becomes normal soon thereafter.
Bindu Srovar (-the pond, lack called Bindu Sarovar) is filled with the pious-pure waters of river Saraswati, where the Almighty had tears of bliss in his eyes due to the extreme pity-kindness evolved towards sage-Rishi Kardam, who sought asylum-shelter-protection-refuse under him. This place of pilgrimage is extremely pious and its waters are meant for the benefit of mankind and like elixir.
The practice of meditation & staunch meditation evolve tears out of extreme love for the Almighty in the heart of the practitioner-devotee. His heart is filled with devotion and he is filled with kindness towards mankind. His body is covered with the tears of bliss which evolve in his eyes due to the curiosity to see-meet the Almighty. At this stage, he slowly divert his concentration from the desired object-physical form of the Ultimate-Sakar Brahm.
Brahma Ji's heart was filled with extreme pleasure-bliss-Parmanand, when he had the opportunity to see the Almighty. His body felt the extreme delight and his eyes were filled with tears of bliss-extreme love.
Dushashan-Dhratrashtr's son pulled the hair of Draupdi, the wife of mighty emperor Yudhistr's head queen & Dhratrashtr's daughter in law. Tears rolled out of her eyes and the kesar-vermilion over her chest too started flowing with them. But, Dhratrashtr did not stop-prevent him from doing this. The kingdom of Dhratrashtr was nailed immediately and its downfall became imminent. Bhagwan Shri Krashn treated her as his sister and she was the queen of 7 Indra previous Manvantars-cosmic periods of time. Draupdi immediately felt his presence as soon she called him for help in the court of Dhratrashtr.
Uddhav Ji, formerly a Vasu-demigod, was too much involved in the memory-remembrance of Bhagwan Shri Krashn, his cousin for 2 hours. He could not utter a single word. Extreme Bhakti Yog-Ultimate state of devotion occured in him, at that moment. He was filled with extreme pleasure-bliss. Vidur Ji incarnation of Dharm Raj was obliged to this stage achieved by him.
One could not control his tears when his son left for UK. Next he visited US and this time too sentiments troubled him. One is neither weak nor incapable or old. He did everything possible for the welfare-well being of his son. His next destination is Oz. The grand daughter too joined him. One is strong enough to face adversities, but he becomes too weak when it comes to the well being of his family. He remembers them everyday and tears accompany his sentiments.
20 मई 2015 को जीवन के 64 बसन्त पूरे हुए, मगर अस्पताल में। पत्नी को घुटनों की शल्य चिकित्सा हेत भर्ती कराया। पूरे दिन जाँच पड़ताल होती रही। अनेकों टेस्ट हुए। बधाई संदेशों को पढ़ने या देखने तक का समय नहीं मिला। 21 मई को गहन शल्य चिकित्सा कक्ष से वापस लाया गया पत्नी को लाया गया। ICU में बिस्तर ख़ाली न होने से डेढ़ घंटे तक अतिरिक्त समय तक रहना पड़ा, गहन शल्य चिकित्सा कक्ष में। जब उन्हें ICU में ले जाया गया; तो उनकी आँखों में दर्द और कष्ट की वजह से आँसू थे। अपनी आँखों में भी दर्द और आंसू भर आये। उनके भाई, भाभियाँ, बहन, भान्जा और दूसरे रिस्तेदार भी थे; मगर फिर भी बेहद अकेलापन महसूस हुआ। दर्द की अभिव्यक्ति है ये। दिल भर आया। बड़ी मुश्किल से काबू पाया। रात पूजा करते समय और अब फिर भर आँखें आईं। [23.05.2015]


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