Thursday, April 30, 2015

पूषा देव PUSHA DEV [ऋग्वेद 1-8]

पूषा देव PUSHA DEV
CONCEPTS & EXTRACTS IN HINDUISM
By :: Pt. Santosh Bhardwaj
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ॐ गं गणपतये नम:।
अक्षरं परमं ब्रह्म ज्योतीरूपं सनातनम्।
गुणातीतं नीराकारं स्वेच्छामयमनन्तजम्॥
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भुर्मा ते संगोऽस्त्वकर्मणि
[श्रीमद्भगवद्गीता 2.47]
आ पूषञ्चित्रबर्हिषमाघृणे धरुणं दिवः।
आजा नष्टं यथा पशुम्॥
हे दिप्तीमान पूषादेव! आप अद्भूत तेजों से युक्त एवं धारण शक्ति से सम्पन्न हैं। अत: सोम को द्युलोक से वैसे ही लायें जैसे खोये हुये पशु को ढूँढ़कर लाते है।[ऋग्वेद 1.23.13]
हे प्रकाश से परिपूर्ण पूषा! जैसे खोये हुए पशु को ढूँढकर लाते हैं, वैसे ही तुम कुशा से परिपूर्ण, अनुष्ठान धारक सोम को ले आओ।
Hey shinning-stunning Pusha Dev! You are blessed with amazing (wonderful, marvellous) powers. Hence, trace-search the Som-Moon in the heavens just as a lost cattle is found.
पूषा राजानमाघृणिरपगूळ्हं गुहा हितम्। अविन्दच्चित्रबर्हिषम्॥
दीप्तिमान पूषादेव ने अंतरिक्ष गुहा में छिपे हुये शुभ्र तेजों से युक्त सोम राजा को प्राप्त किया।[ऋग्वेद 1.23.14]
समस्त ओर से प्रकाशमान पूषा ने गुफा में छिपे हुए कुश सहित सम्राट सोम को ग्रहण किया।
Glittering-bright Pusha Dev traced-found the king Som-Moon, having aura & brightness, in the space-sky tunnel.
उतो स मह्यमिन्दुभिः षड्युक्ताँ अनुसेषिधत्। गोभिर्यवं न चर्कृषत्॥
वे पूषादेव हमारे लिये याग के हेतुभूत सोम के साथ वसंतादि षट्‍ऋतुओं को क्रमशः वैसे ही प्राप्त कराते हैं, जैसे यवों (जौ) के लिये कृषक बार-बार खेत जोतता है।[ऋग्वेद 1.23.15]
वह युवा सुघटित और ऋतुओं को सोमों द्वारा ग्रहण करता रहे, जैसे कृषक जौ को बार-बार ग्रहण करता है। 
The Pusha Dev arrange-manage Som-Moon along with the six seasons in an order just like the farmer, who plough the field for producing barley.
ऋग्वेद संहिता, प्रथम मंडल (सूक्त 42) :: ऋषि :- कण्व धौर, देवता :- पूषा, छन्द :- गायत्री।
सं पूषन्नध्वनस्तिर व्यंहो विमुचो नपात्। सक्ष्वा देव प्र णस्पुरः॥
हे पूषा देव! हम पर सुखों को न्योछावर करें। पाप मार्गों से हमें पार लगायें। हे देव! हमें आगे बढा़यें।[ऋग्वेद 1.42.1]
हे पूजन! हमको कष्टों से पार लगाओ और हमारे पापों को समाप्त करो। हमारे गामी बनो।
Hey Pusha Dev! Shower bliss over us. Make us swim us over the path of sin, vices, wickedness. Hey Dev! Promote us-enhance our progress.
यो नः पूषन्नघो वृको दुःशेव आदिदेशति। अप स्म तं पथो जहि॥
हे पूषा देव! जो हिंसक, चोर जुआ खेलने वाले हम पर शासन करना चाहते हैं, उन्हें हम से दूर करें।[ऋग्वेद 1.42.2]
हे पूषादेव! हिंसक चोर, जुआ खेलने वाले जो हम पर राज करना चाहते उन्हें हम से दूर कर दो।
Hey Pusha Dev! The violent gamblers, who wish to rule-over power us should be repelled away from us.
अप त्यं परिपन्थिनं मुषीवाणं हुरश्चितम्। दूरमधि स्रुतेरज॥
हे पूषा देव! मार्ग में घात लगाने वाले तथा लूटने वाले कुटिल चोर को हमारे मार्ग से दूर करके विनष्ट करें।[ऋग्वेद 1.42.3]   
मार्ग में रोकने वाले, चोरी, लूटपाट करने वाले, कुटिल दस्यू हमारे रास्ते से हटाओ।
धात लगाना :: ambush.
Hey Pusha Dev! Remove, repel, destroy the crooked thief who wish to ambush, loot, torture us on the way.
त्वं तस्य द्वयाविनोऽघशंसस्य कस्य चित्। पदाभि तिष्ठ तपुषिम्॥
आप हर किसी दुहरी चाल चलने वाले कुटिल हिंसकों के शरीर को पैरों से कुचल कर खड़े हों अर्थात इन्हें दबाकर रखें, उन्हें बढ़ने न दे।[ऋग्वेद 1.42.4]
हे पुषन्! तुम पाप को बढ़ावा देने वाले तथा क्रोधी को अपने से कुचल डालो।
You should over power-control the wicked, violent, crooked with your legs and don't let them move further.
आ तत्ते दस्र मन्तुमः पूषन्नवो वृणीमहे। येन पितॄनचोदयः॥
हे दुष्ट नाशक, मनीषी पूषादेव! हम अपनी रक्षा के निमित्त आपकी स्तुति करते हैं। आपके संरक्षण ने ही हमारे पितरों को प्रवृद्ध किया था।[ऋग्वेद 1.42.5]
हे विकराल कर्म वाले ज्ञानी पूषादेव! तुम्हारी रक्षा के लिए हम प्रार्थना करते हैं। इस रक्षा ने हमारे पूर्व पुरुषों को भी बढ़ाया था। 
Hey the destroyer of the wicked, viceful, enlightened Pusha Dev! We pray to you for our protection. You protected our Manes-ancestors and made them progress.
अधा नो विश्वसौभग हिरण्यवाशीमत्तम। धनानि सुषणा कृधि॥
हे सम्पूर्ण सौभाग्ययुक्त और स्वर्ण आभूषणों से युक्त पूषादेव! हमारे लिए सभी उत्तम धन एवं सामर्थ्यो को प्रदान करें।[ऋग्वेद 1.42.6]
हे परम सौभाग्यशाली, रथ वाले पूषादेव! हमारे लिए सुसाध्य धनों को प्राप्त करने की सामर्थ्य दो।
Hey lucky, ornamented with gold, Pusha Dev! Grant us excellent riches, strength-power. 
अति नः सश्चतो नय सुगा नः सुपथा कृणु। पूषन्निह क्रतुं विदः॥
हे पूषा देव! कुटिल दुष्टों से हमें दूर ले चलें। हमें सुगम-सुपथ का अवलम्बन प्रदान करें एवं अपने कर्तव्यों का बोध करायें।[ऋग्वेद 1.42.7]
झगड़ों में फंसे हुए हमको शत्रुओं से दूर ले जाओ। हमको आसान मार्ग अवलम्बी बनाओ।
Hey Pusha Dev! Take us away from the wicked, guide us to the simple way and tell us our duties.
अभि सूयवसं नय न नवज्वारो अध्वने। पूषन्निह क्रतुं विदः॥
हे पूषा देव! हमें उत्तम जौ (अन्न) वाले देश की ओर ले चलें। मार्ग में नवीन संकट न आने पायें। हमें अपने कर्तव्यों का ज्ञान करायें।(हम इन कर्तव्यों को जाने)।[ऋग्वेद 1.42.8]
हे पूजन! हमारी सुरक्षा के लिए शक्ति प्रदान करो। जहाँ कृषि के उपयुक्त धरा हो। हमको वहाँ ले चलो। रास्ते में कोई नया कष्ट न आवे। हमारी सुरक्षा लिये बलशाली होओ।
Hey Pusha Dev! Take us to the country-place enriched with best food grains. Ensure that new tensions-tortures don't come in our way. Make us strong and tell us our duties (do's and don't).
शग्धि पूर्धि प्र यंसि च शिशीहि प्रास्युदरम्। पूषन्निह क्रतुं विदः॥
हे पूषा देव! हमें सामर्थ्य दें। हमें धनों से युक्त करें। हमें साधनों से सम्पन्न करें। हमें तेजस्वी बनायें। हमारी उदरपूर्ति करें। हम अपने इन कर्तव्यों को जाने।[ऋग्वेद 1.42.9]
हे सामर्थवान पूषन! हमको अभिलाषी धन प्रदान करो। हमें तेजस्वी बनाओ। हमारी उदर पूर्ति करो। हमारे लिए शक्ति ग्रहण करो।
Hey Pusha Dev! Make us capable & strong. Enrich us with means of production-working to earn our livelihood and our working-duties.
न पूषणं मेथामसि सूक्तैरभि गृणीमसि। वसूनि दस्ममीमहे॥
हम पूषा देव को नहीं भूलते! सूक्तों में उनकी स्तुति करते हैं। प्रकाशमान सम्पदा हम उनसे माँगते हैं।[ऋग्वेद 1.42.10]
हम देव की निंदा नहीं वन्दना करते हैं। उस दिव्य देव से धन माँगते हैं।
We do not forget Pusha Dev! We pray him with the help of Sukt-divine phrases, hymns. We request for enlightenment (education, learning), the knowledge which can guide us, pave our way.
ऋग्वेद संहिता, प्रथम मण्डल सूक्त (138) ::  ऋषि :- परुच्छेपो, देवता :- पूषा, छन्द :- अत्यष्टि
प्रप्र पूष्णस्तुविजातस्य शस्यते महित्वमस्य तवसो न तन्दते स्तोत्रमस्य न तन्दते। अर्चामि सुम्नयन्नहमन्त्यूतिं मयोभुवम्। विश्वस्य यो मन आयुयुवे मखो देव आयुयुवे मखः
अनेक मनुष्यों द्वारा पूजित पूषा (सूर्य) देव की शक्ति की महिमा सर्वत्र प्रशंसा प्राप्त करती है। कोई उसे मारना नहीं चाहता। पूषा के स्तोत्र की विश्रान्ति नहीं है। मैं सुख पाने की इच्छा से पूषा की पूजा करता हूँ। वे तत्काल सहायता करते हुए हर्ष प्रदान करते हैं। वे पूषा यज्ञ वाले है। वे समस्त मनुष्यों के मन के साथ मिल जाते है।[ऋग्वेद 1.138.1]
पूषा (सूर्य) का बहुत अधिक महत्व है। उसकी शक्ति कम नहीं होती। उसका श्लोक हमेशा वृद्धि करने वाला है। मैं कल्याण की कामना से उसे नमस्कार करता हूँ। उसने समस्त हृदयों को आकृष्ट कर लिया है।
The glory of Pusha (Sun) is recognised & appreciated everywhere by several humans. None wants to kill it. There is no end to the Strotr pertaining to Pusha. I pray-worship Pusha with the desire-will of getting comforts-pleasure. He quickly deliver help and grant pleasure. Pusha stands for Yagy. He occupies a place in the innerself (mind, heart & soul) of the humans.
प्र हि त्वा पूषन्नजिरं न यामनि स्तोमेभिः कृण्व ऋणवो यथा मृध उष्ट्रो न पीपरो मृधः। हुवे यत्त्वा मयोभुवं देवं सख्याय मर्त्यः। अस्माकमाङ्गूषाधुम्निनस्कृधि वाजेषु द्युमिनस्कृधि
जिस प्रकार से शीघ्र चलने वाले घोड़े की प्रशंसा होती है, वैसे ही, हे पूषन्। मंत्रों द्वारा मैं आपकी प्रशंसा करता हूँ। ऊँट की तरह आप हमें हिंसक शत्रुओं से सुरक्षित रखते हैं। आप से सुख प्रदत्त करने वाले देवता हैं और मैं मनुष्य हूँ, मित्रता पाने के लिए मैं आपका आवाहन करता हूँ। मेरी आवाहन की शक्ति को बढ़ावें और मुझे संग्राम में विजयी बनावें।[ऋग्वेद 1.138.2]
हे पृषा! शीघ्रगामी प्राणी को राह में श्रेष्ठ दिशा बताने के समान तुम्हें श्लोक से प्रेरणा करता हूँ जिससे तुम हमारे शत्रुओं को दूर करो। मैं तुम्हारा आह्वान करता हूँ। मुझे युद्धों में शक्तिशाली बनाओ।
Hey Pusha! The way a fast moving horse is appreciated, similarly, I appreciate you with the help of Mantr (hymns). You protect us from violent enemies like a camel. Demigods-deities attain pleasure-comforts from you. I am a human requesting you for friendship. Please boost my power of request-invitation (inciting, invoking) and make be win in the war-struggle.
यस्य ते पूषन्त्सख्ये विपन्यवः क्रत्वा चित्सन्तोऽवसा बुभुज्रिर इति कृत्वा बुभुज्रिरे। तामनु त्वा नवीयसी नियुतं राय ईमहे। अहेळमान उरुशंस सरी भव वाजेवाजे सरी भव
हे पूषन्! आपकी मित्रता प्राप्त करके विशेष यज्ञ द्वारा आपको प्रसन्न करते हुए, स्तोत्र परायण यजमान आपके द्वारा रक्षित होकर नाना प्रकार के भोग भोगते हैं। आपका संरक्षण प्राप्त कर आपके पास से असँख्य धन चाहते हैं। हे बहुतों के द्वारा स्तवनीय पूषादेव! हमारा अनादर न करके हमारे सामने आवें और युद्धकाल में हमारे अग्रगामी बनायें।[ऋग्वेद 1.138.3]
हे पूषन! तुम्हारी वंदना में लगे हुए मनुष्य ही तुम्हारी रक्षाओं को ग्रहण कर सकें। हम ज्ञान से सम्पन्न हुए नये श्लोक द्वारा तुम से असंख्य धन की विनती करते हैं। तुम हम पर क्रोध मत करो। प्रत्येक संग्राम में हमारे सहायक बनो।
Hey Pusha! We enjoy in several ways after attaining your friendship,
by virtue of special-significant Yagy. We wish to acquire unlimited riches-wealth under your protection, asylum, shelter. Hey, revered by many, Pusha! Don't ignore us, come to us and make us able to occupy front row in a war-fight.
अस्या ऊ षु ण उप सातये भुवोऽहेळमानो ररिवाँ अजाश्व श्रवस्यतामजाश्व। ओ षु त्वा ववृतीमहि स्तोमेभिर्दस्म साधुभिः। नहि त्वा पूषन्नतिमन्य आघृणे न ते सख्यमपहह्नु वे
हे अज वाहन वाले पूषन्! हमारे लाभ के लिए अनादर न कर और दानशील होकर हमारे पास पधारें। हे अजाश्च पूषन्। हम अन्न चाहते हैं। हमारे पास आवें। हे शत्रुहन्ता पूषन्! हम उत्तम स्तोत्रों से आपकी स्तुति करते हैं। हे जलवर्षक पूषादेव! हम आपके द्वारा अनादर से परे रहें और आपकी मैत्री से कभी वंचित न हो अर्थात् आपकी मित्रता हमें सदैव प्राप्त होती रहे।[ऋग्वेद 1.138.4]
हे अजाश्व पूषन! तुम दान के लिए क्रोध से रहित हुए यहाँ आओ। हम यश की अभिलाषा करते हैं। हम तुम्हारा तिरस्कार नहीं कर सकते। आपके मित्र-भाव की आलोचना नहीं करते। तुम अद्भुत कर्मवाले श्लोक पर ध्यान दो।
Hey goat rider Pusha! Please do not neglect us, become a donor and come to us. We want food stuff. Hey slayer of the enemy! We pray to you with the help of decent hymns-Shloks. Hey rain causing Pusha! We should be blessed with your friendship.
ऋग्वेद संहिता, द्वितीय मण्डल सूक्त (40) :: ऋषि :- गृत्समद, भार्गव, शौनक, देवता :- सोम, पूषा, अदिति, छन्द :- त्रिष्टुप।
सोमापूषणा जनना रयीणां जनना दिवो जनना पृथिव्याः।
जातौ विश्वस्य भुवनस्य गोपौ देवा अकृण्वन्नमृतस्य नाभिम्
आप धन, द्युलोक और पृथ्वी के पिता है। जन्म के अनन्तर ही आप सारे संसार के रक्षक हुए हैं। देवों ने आपको अमृत का केन्द्र बनाया है।[ऋग्वेद 2.40.1]
तुम धन, अम्बर, और धरा के पिता हो। जन्म लेने के बाद ही तुम संसार के रक्षक बन गये। देवताओं ने तुम्हें अमरत्व प्रदान करने वाला बनाया।
You are the father of the heavens, wealth and the earth. You turned into the protector of the universe soon after your birth. The demigods-deities have made you the centre of nectar, elixir, ambrosia, Amrat.
इमौ देवौ जायमानौ जुषन्तेमौ तमांसि गूहतामजुष्टा। 
आभ्यामिन्द्रः पक्वमामास्वन्तः सोमापूषभ्यां जनदुत्रियासु
जन्मते ही द्युतिमान् सोम और पूषा की देवों ने सेवा की। ये दोनों अप्रिय अन्धकार का विनाश करते हैं। इनके साथ इन्द्र देव तरुणी, धेनुओं के अधः प्रदेश में पक्व दुग्ध उत्पन्न करते हैं।[ऋग्वेद 2.40.2]
तेजस्वी सोम और पूषा के जन्म लेते ही देवों ने उनकी सेवा की। इन दोनों ने अहितकर अंधकार को मिटाया। इनकी सहायता से इन्द्र युवती धेनुओं के निम्नवत हिस्से वाले भाग में दुग्ध को रचित करते हैं।
The demigods-deities served bright Som-Moon and Pusha as soon as they took birth. Indr Dev evolved milk in the udder of the cows.
सोमापूषणा रजसो विमानं सप्तचक्रं रथमविश्वमिन्वम्। 
विषूवृतं मनसा युज्यमानं तं जिन्वथो वृषणा पञ्चरश्मिम्
हे अभीष्ट वर्षी सोम और पूषा! आप संसार के विभाजक, सप्त चक्र (सात ऋतु, मलमास लेकर) वाले संसार के लिए अविभाज्य, सर्वत्र वर्तमान और पंच रश्मि (पाँच ऋतू, हेमन्त और शीत को एक में करके) वाले हैं। इच्छा उत्पन्न होते ही योजित रथ हमारे सामने प्रेरित करते हैं।[ऋग्वेद 2.40.3]
इच्छित वर्षों में सोम और पूषा! तुमने संसार का विभाजन किया, तुम मल मास रहित सातों ऋतुओं से युक्त संसार के लिए पांच किरणों से युक्त हो। कामना करते ही अपना जाता हुआ रथ हमारे सम्मुख लाते हो।
Accomplishment fulfilling Som & Pusha! You divide the universe-year in seven cycles i.e., seasons and join the five seasons with Hemant and winter. Your charoite come to us as soon we desire.
In general we observe 4 seasons but in reality they are 6 in number. Though there are 12 months in a year according to ancient Hindu calendars and yet the 13th month is added for correction, since lunar mass varies considerably in number of days from 27 to 31. 
Please refer to ::  ANCIENT HINDU CALENDAR  काल गणना santoshkipathshala.blogspot.com
दिव्य १ न्यः सदनं चक्र उच्चा पृथिव्यामन्यो अध्यन्तरिक्षे। 
तावस्मभ्यं पुरुवारं पुरुक्षं रायस्पोषं वि ष्यतां नाभिमस्मे
आप में से एक जन (पूषा) उन्नत द्युलोक में रहते हैं। दूसरे (सोम) औषधि रूप से पृथ्वी  और चन्द्र रूप से अन्तरिक्ष में रहते हैं। आप दोनों अनेक लोगों में वरणीय, बहुकीर्तिशाली हमारे भाग का कारण और पशु-रूप धन हमें प्रदान करें।[ऋग्वेद 2.40.4]
सोम पूषा औषधि रूप से पृथ्वी पर तथा चन्द्रमा रूप से उन्नतशील अम्बर में निवास करते हैं। तुम दोनों प्रशंसा योग्य, वरण करने के योग्य, सुन्दर पशु धन प्रदान करो।
One of you, Pusha resides-lives in the heaven and the second i.e., Som lives over the earth in the form of medicines (Ayur Vedic Medicines herbs). Som lives in space as a material object-satellite of earth. Both of you are appreciable & acceptable to most of the people. Grant our share of riches in the form of cattle. 
विश्वान्यन्यो भुवना जजान विश्वमन्यो अभिचक्षाण एति। 
सोमापूषणाववतं धियं मे युवाभ्यां विश्वाः पृतना जयेम
हे सोम और पूषा! आपमें से एक (सोम) ने सारे भूतों को उत्पन्न किया। दूसरे (पूषा) सारे संसार का पर्यवेक्षण करते हैं। हे सोम और पूषा! आप हमारे कर्म की रक्षा करें। आपकी सहायता से हम शत्रु सेना पर विजय प्राप्त करें।[ऋग्वेद 2.40.5]
हे सोम और पूजन! तुमने समस्त भूतों को प्रकट किया। पूषा समस्त संसार को देखते हैं। तुम दोनों हमारे कार्यों के रक्षक हो। तुम्हारी शक्ति से हम शत्रु सेना को विजय कर लें। 
Hey Som & Pusha! Som is the creator of all that which has been perished-past. Pusha observes the universe. Hey Som & Pusha! Let both of you become the protector of our endeavours-duty. We should win the enemy with your help. 
धियं पूषा जिन्वतु विश्वमिन्वो रयिं सोमो रयिपतिर्दधातु। 
अवतु देव्यदितिरनर्वा बृहद्वदेम विदथे सुवीराः
संसार को प्रसन्नता देने वाले पूषा हमारे कर्म से तृप्ति प्राप्त करें। धनपति सोम हमें धन प्रदान करें। द्युतिमती और शत्रु रहिता अदिति हमारी रक्षा करें। हम सुसंतति युक्त होकर यज्ञ में आपका यशोगान करें।[ऋग्वेद 2.40.6]
संसार को सुख प्रदान करने वाले पूषा हमारे कर्म से संतुष्ट हों। धन से सम्पन्न सोम हमको धन दें। तेजस्विनी, अदिति शत्रुओं से हमारी रक्षा करें। हम पुत्र और पौत्रों से युक्त, यज्ञ में अधिक श्लोक पाठ करेंगे।
Let Pusha who grant happiness-pleasure to the whole world be satisfied with our endeavours-deeds. Let-wealthy Som grant us riches. Let glorious-bright Aditi having no enemy, protect us. We should sing your glory blessed with sons and grandsons. 
इयं ते पूषन्नाघृणे सुष्टुतिर्देव नव्यसी। अस्माभिस्तुभ्यं शस्यते
हे दीप्तिमान् पूषा! ये नीवनतम और शोभन स्तुति रूप वचन आपके लिए का उच्चारण हम लोग आपके लिए ही करते हैं।[ऋग्वेद 3.62.7]
हे पूषन! तुम सभी तरह से प्रकाशमान तथा प्रत्येक सुख की वर्षा करने में समर्थ हो। तुम्हारा वह अत्यन्त नया श्लोक सदैव वंदना करने के योग्य हो। इस उत्तम वंदना को हम तुम्हारे प्रति हमेशा उच्चारण करते रहें।
Hey radiant showerer of comforts Pusha Dev! We recite these excellent verses-hymns, compositions-Strotr in your honour.
तां जुषस्व मिरं मम वाजयन्तीमवा धियम्। वधूयुरिव योषणाम्
हे पूषा! मेरी उस प्रार्थना को स्वीकार करें। स्वीकार स्त्री के अभिमुख आगमन करता है, उसी प्रकार आप इस हर्षकारिणी प्रार्थना के अभिमुख आगमन करें।[ऋग्वेद 3.62.8]
पत्नी की इच्छा करने वाला मनुष्य जैसे चाहत करने वाली रमणी को स्नेह पूर्वक स्वीकार करता है। वैसे ही हे पूजन! मेरी उस ज्ञानमय तथा सत्यासत्य को जानने वाली और उत्तम धनावती मंत्र युक्त बुद्धि को स्नेह भावना पूर्वक स्वीकृत करो।
Hey Pusha Dev! Respond-accept our prayers, with the enlightened, truthful words, the way a person desirous of companion-wife does it.  
यो विश्वाभि विपश्यति भुवना सं च पश्यति। स नः पूषाविता भुवत्
जो पूषा निखिल लोक को विशेष रूप से देखते हैं और उसे देखते हैं, वे ही पूषा हम लोगों का रक्षण करें।[ऋग्वेद 3.62.9]
जो पूषा सभी लोकों को समान रूप से देखते हैं तथा समस्त संसार को विविध दृष्टिकोण से देखते हैं, वह हमारे पोषक तथा सभी तरह से हमारे रक्षक हैं।
Let Pusha Dev who looks at the entire universe uniformly, nourish & protect us. 
प्र तव्यसो नमउक्तिं तुरस्याहं पूष्ण उत वायोरदिक्षि।
या राधसा चोदितारा मतीनां या वाजस्य द्रविणोदा उत त्मन्
हम बलवान् और वेग पूर्वक गमन करने वाले पूषा तथा वायु देव की प्रार्थना करते हैं। ये दोनों देव धन और अन्न के लिए लोगों की बुद्धि को प्रेरित करें अथवा जो देव संग्राम के प्रेरक हैं, वे धनप्रदान करें।[ऋग्वेद 5.43.9]
We worship dynamic-accelerated mighty Pusha and Vayu Dev. Let both of them inspire the minds of public-populace for food grains and wealth or else, those who are the inspirer of war grant wealth.
आ मा पूषन्नुप द्रव शंसिषं नु ते अपिकर्ण आघृणे। अघा अर्यो अरातयः
हे पूषा देव! आप शीघ्र मेरे पास आवें। दीप्तिमान देव भीषण आक्रमण करने वाले शत्रुओं को पीड़ा पहुँचावें। मैं भी आपके कर्ण (कान) के पास आकर गुणगान करता हूँ।[ऋग्वेद 6.48.16]
Hey Pusha Dev! Come to me quickly. Hey radiant deity torture the invading enemies. I sing songs of your glory near-close to your ears.
मा काकम्बीरमुद्वृहो वनस्पतिमशस्तीर्वि हि नीनशः।
मोत सूरो अह एवा चन ग्रीवा आदधते वेः
हे पूषा देव! आप कौओं के आश्रयभूत वनस्पति को नष्ट मत करना। मेरे निन्दकों को पूर्णतः नष्ट कर दें। जिस प्रकार से व्याध चिड़ियों को फँसाने के लिए जाल फैलाता है, उसी प्रकार शत्रु लोग मुझे किसी भी प्रकार से बाँध न सकें।[ऋग्वेद 6.48.17]
Hey Pusha Dev! Do not destroy the vegetation sheltering the crows. Destroys my cynics. The enemy should not be able to bind-tie me like the hunter who spread net to catch the birds. 
दृतेरिव तेऽवृकमस्तु सख्यम्। अच्छिद्रस्य दधन्वतः सुपूर्णस्य दधन्वतः
हे पूषा देव! आपसे हमारी मैत्री छिद्र रहित दधि पात्र के सदृश निर्बाध एवं अविच्छिन्न बनी रहे।[ऋग्वेद 6.48.18]
Hey Pusha Dev! Let our friendship with you, remain free from holes like the pot containing curd; continuously and unbroken.
परो हि मर्त्यैरसि समो देवैरुत श्रिया।
अभि ख्यः पूषन् पृतनासु नस्त्वमवा यथा पुरा
हे पूषा देव! आप मनुष्यों का अतिक्रम करके अवस्थित हैं। धन में देवों के तुल्य हैं। इसलिए संग्राम में हमारी ओर अनुकूल दृष्टि रखें। प्राचीन समय में आपने मनुष्यों की जिस प्रकार से रक्षा की, उसी प्रकार इस समय हमारी रक्षा करें।[ऋग्वेद 6.48.19]
अतिक्रम :: मर्यादा का उल्लंघन, दुरुपयोग; deviation.
Hey Pusha Dev! You are stabilized by deviating from the norms set for the humans. You are like the demigods-deities in granting-possessing wealth. You should be favourable to us in war. The way you safe guarded the humans protect us as well now.
ऋग्वेद संहिता, षष्ठम मण्डल सूक्त (53) :: ऋषि :- ऋजिश्वा भरद्वाज; देवता :- पूषा,  छन्द :- गायत्री, अनुष्टुप्।
वयमु त्वा पथस्पते रथं न वाजसातये। धिये पूषन्नयुज्महि
हे मार्ग पति पूषन! कर्मानुष्ठान और अन्न लाभ के लिए युद्ध स्थल में रथ के सदृश हम आपको अपने अभिमुख करते हैं।[ऋग्वेद 6.53.1]
कर्मानुष्ठान :: किसी व्यक्ति द्वारा की गई कोई भी क्रिया, शास्त्र विहित कर्म, संध्या, अग्निहोत्र; rituals.
Hey lord of roads! We present our selves before you for rituals and food grains like the charoite in the war.
अभि नो नर्यं वसु वीरं प्रयतदक्षिणम्। वामं गृहपतिं नय
हे पूषन! हमारे यहाँ मानव हितैषी, धन-दान में मुक्त हस्त और विशुद्ध दान वाला एक गृहस्थ भेजें।[ऋग्वेद 6.53.2]
Hey Pusha! Send the house hold here who is devoted to human welfare-benefits & donate freely with pious money. 
अदित्सन्तं चिदाघृणे पूषन्दानाय चोदय। पणेश्चिद्वि प्रदा मनः
हे दीप्ति सम्पन्न पूषन! कृपण को दान देने के लिए प्रेरित करें और उसके हृदय को कोमल बनावें।[ऋग्वेद 6.53.3]
Hey radiant Pusha! Inspire the miser to donate and soften his heart.
वि पथो वाजसातये चिनुहि वि मृधो जहि। साधन्तामुग्र नो धियः
हे प्रचण्ड बलशाली पूषन! अन्न लाभ के लिए समस्त पथ परिष्कृत करें। विघ्नकारी चोर आदि का संहार करें और हमारे अनुष्ठानों को सफल करें।[ऋग्वेद 6.53.4]
प्रचंड :: अत्यधिक उग्र, तीव्र या तेज़ी होना, बहुत तीखा, उग्र, प्रखर, प्रबल, बहुत अधिक वेगवान, भंयकर, भीषण, अति तेजस्वी, प्रतापी, दुस्सह, असह्य, पुष्ट, बलवान, कठिन, विश्वासंबंधी, विश्विक, अवाढव्य, विराट, कठोर, बड़ा, भारी, अत्यंत क्रोधी, कठोर, उग्र, कड़ा; terrific, severe, huge, colossal,  cosmic, convulsion.
परिष्कृत :: साफ़ किया हुआ, सुधारा हुआ; sophisticated, refined.
Hey terrific Pusha Dev! Refine the road fro gain of food grains. destroy the troubling thieves etc. and make our rituals-endeavours successful.
परि तृन्धि पणीनामारया हृदया कवे। अथेमस्मभ्यं रन्धय 
हे ज्ञानी पूषन! सूक्ष्म लोहा प्रदण्ड (आरा) से पणियों या लुब्धकों का हृदय परिवर्तित कर हमारे वश में करें।[ऋग्वेद 6.53.5]
Hey enlightened Pusha Dev! Change the hearts of either the Panis or Lubdhak with small severe iron rod-weapon and put them under our control.
वि पूषन्नारया तुद पणेरिच्छ हृदि प्रियम्। अथेमस्मभ्यं रन्धय
हे पूषन! सूक्ष्म लोहाग्र दण्ड (प्रतोद या आरा) से पणि या चोर का हृदय परिवर्तित करें। उसके हृदय में सद्भावना भरें और उसे मेरे वशीभूत करें।[ऋग्वेद 6.53.6]
सद्भावना :: अच्छी नीयत, सद्भाव, सद्‍भाव से, नेकनीयती, सदाशयता, goodwill, good faith, bonafied.
Hey Pusha Dev! Change the heart of Pani or thief with the sharp-small pointed rod, with sharp head. Fill his heart with good will.
आ रिख किकिरा कृणु पणीनां हृदया करें। अथेमस्मभ्यं रन्धय
हे ज्ञानी पूषन्देव! चोरों के हृदयों को रेखाङ्कित करें। उनके हृदयों की कठोरता को भली-भाँति कम करें और उन्हें हमारे वश में करें।[ऋग्वेद 6.53.7]
Hey enlightened Pusha Dev! Touch the hearts of thieves. Soften their hearts and put them under our control.
यां पूषन्ब्रह्मचोदनीमारां बिभर्ष्याघृणे।
तया समस्य हृदयमा रिख किकिरा कृणु
हे दीप्ति सम्पन्न पूषन! आप अन्न प्रेरक प्रतोद धारण कर उसके द्वारा समस्त लोभी व्यक्तियों का हृदय रेखाङ्कित करें एवं उसकी कठोरता शिथिल करें।[ऋग्वेद 6.53.8]
प्रतोद :: पशु हाँकने की छड़ी, औगी, पैना, कोड़ा, चाबुक, एक प्रकार का साम गान; whiplash.
Hey aurous Pusha Dev! Bear the whiplash for directing the greedy for releasing food grains, punish the greedy and soften their hearts.
या ते अष्ट्रा गोओपशाघृणे पशुसाधनी। तस्यास्ते सुम्नमीमहे
हे दीप्तिशाली पूषन देव! आप जिस अस्त्र से धेनुओं और पशुओं को परिचालित करते हैं, हम आपके उसी अस्त्र से उपकार की प्रार्थना करते हैं।[ऋग्वेद 6.53.9]
Hey radiant Pusha Dev! We worship-pray your weapon for favours with which you controlled the cows and animals. 
उत नो गोषणिं धियमश्वसां वाजसामुत। नृवत्कृणुहि वीतये
हे पूषन देव! हमारे यज्ञादि कार्य की सफलता हेतु आप गौ, अश्व, अन्न और सेवक प्रदान करें।[ऋग्वेद 6.53.10]
Hey Pusha Dev! Grant us cows, horses and servants for the success of our Yagy.(18.10.2023)
ऋग्वेद संहिता, षष्ठम मण्डल सूक्त (54) :: ऋषि :- ऋजिश्वा भरद्वाज बार्हस्पत्य; देवता :- पूषा,  छन्द :- गायत्री।
सं पूषन्विदुषा नय यो अञ्जसानुशासति। य एवेदमिति ब्रवत्
हे पूषा देव! आप हमें एक ऐसे विलक्षण व्यक्ति से मिलावें, जो हमें वस्तुतः रास्ता बतावें और जो हमारे अपहृत द्रव्य को प्राप्त करने का मार्ग बतावें।[ऋग्वेद 6.54.1]
Hey Pusha Dev! Arrange our meeting some amazing person who can show us the right path and guide us the way to recover our snatched-looted wealth.
समु पूष्णा गमेमहि यो गृहाँ अभिशासति। इम एवेति च ब्रवत् 
हम पूषा की कृपा से ऐसे व्यक्ति से मिलें, जो समस्त गृह में दिखावेगा और कहेगा कि ये ही आपके खोये हुए पशु हैं।[ऋग्वेद 6.54.2]
We should meet some one by the grace of Pusha Dev who will direct-guide us to place-house where our animals are hidden.
पूष्णश्चक्रं न रिष्यति न कोशोऽव पद्यते। नो अस्य व्यथते पविः
पूषा का आयुध चक्र विनष्ट नहीं होता। इस चक्र का कोश हीन नहीं होता और इसकी धार कुण्ठित नहीं होती।[ऋग्वेद 6.54.3]
The weapon disc of Pusha Dev which is never destroyed nor its tooth-edge become blunt. Its revolutions-cycles are maintained.
यो अस्मै हविषाविधन्न तं पूषापि मृष्यते। प्रथमो विन्दते वसु
जो व्यक्ति हव्य द्वारा पूषा की सेवा करता है, उसका पूषा लेशमात्र भी अपकार नहीं करते और प्रधानतः वही व्यक्ति धन भी प्राप्त करता है।[ऋग्वेद 6.54.4]
One who make offerings and serve Pusha Dev is not harmed by him and granted wealth.
पूषा गा अन्वेतु नः पूषा रक्षत्वर्वतः। पूषा वाजं सनोतु नः
रक्षा के लिए हमारी गायों का पूषा अनुसरण करें। वे हमारे अश्वों की रक्षा करें और हमें अन्न एवं धन प्रदान करें।[ऋग्वेद 6.54.5]
Let Pusha Dev follow our cows for their protection; protect our horses and grant us food grains and wealth as well.
पूषन्ननु प्र गा इहि याजकगणस्य सुन्वतः। अस्माकं स्तुवतामुत
हे पूषा देव! रक्षा के लिए सोम का अभिषव करने वाले याजकगण की गौओं का अनुसरण जानी-मानी गौवें भी करें।[ऋग्वेद 6.54.6]
Hey Pusha Dev! Let the well knows cows follow the cows of the Ritviz for protection, who extract Somras.
माकिर्नेशन्माकी रोरिषन्माकीं सं शारि केवटे। अथारिष्टाभिरा गहि
हे पूषा देव! हमारा गोधन नष्ट न होने पावे। यह व्याघ्रादि द्वारा मोहित न होने पावे। यह कुएँ में न गिरे। इसलिए आप अहिंसित गौवों के साथ सायंकाल हमारे पास लौट आवें।[ऋग्वेद 6.54.7]
Hey Pusha Dev! Make sure that our wealth in the form of cows is not lost. It should not be enchanted-mesmerised by the tiger etc. It should not fall into the well. Hence, you should return in the evening with the unharmed cows.
शृण्वन्तं पूषणं वयमिर्यमनष्टवेदसम्। ईशानं राय ईमहे
हमारे स्तोत्रों को सुनने वाले, दारिद्र नाशक, अविनष्ट धन और समस्त संसार के अधिपति पूषादेव के पास हम धन के लिए प्रार्थना करते हैं।[ऋग्वेद 6.54.8]
We worship-pray in front of Pusha Dev who is the lord of the world, for wealth. He listen our Strotr, remove poverty and protect the wealth.
पूषन्तव व्रते वयं न रिष्येम कदा चन। स्तोतारस्त इह स्मसि
हे पूषा देव! जब तक हम आपकी उपासना में लगे रहते हैं, तब तक हम कभी मारे न जावें। प्रत्युत पहले की तरह ही सुरक्षित रहें।[ऋग्वेद 6.54.9]
Hey Pusha Dev! We should be alive till we are busy with your worship-prayers and remain protected as before.
परि पूषा परस्ताद्धस्तं दधातु दक्षिणम्। पुनर्नो नष्टमाजतु 
हे पूषा देव! अपने दाहिने हाथ से हमारे गोधन को कुमार्ग गामी होने से बचावें। वे हमारे नष्ट गोधन को पुनः प्राप्त करावें।[ऋग्वेद 6.54.10]
Hey Push Dev! Protect our cows from following wrong direction with your right hand. He should restore our lost wealth in the form of cows.(19.10.2023)
ऋषि :-
एहि वां विमुचो नपादाघृणे सं सचावहै। रथीर्ऋतस्य नो भव
हे दीप्ति सम्पन्न प्रजापति पुत्र पूषा देव! आपका स्तोता मेरे पास आवे। हम दोनों मिलें और आप हमारे यज्ञकर्म का नेतृत्व करें।[ऋग्वेद 6.55.1]
Hey radiant Pusha Dev, son of Praja Pati! Let your Strotr come to me. We should join together and lead the Yagy activities.
रथीतमं कपर्दिनमीशानं राधसो महः। रायः सखायमीमहे
हम अपने रथि श्रेष्ठ, चूड़ावान (कपर्दी), अतुल ऐश्वर्य के अधिपति और अपने मित्र पूषा के पास धन की याचना करते हैं।[ऋग्वेद 6.55.2]
हम अपने मित्र पूषा, सारथियों के मुखिया, चोटी-बालों की पहनने वाले, अनंत धन के स्वामी से धन की याचना करते हैं।
We solicit riches of our friend, Pusha, the head of charioteers, the wearer of a braid of hair, the lord of infinite wealth.
We request our friend Pusha, who is an excellent charioteer, has band of hair our the head, possessor of infinite wealth; for wealth.
रायो धारास्याघृणे वसो राशिरजाश्व। धीवतोधीवतः सखा
हे दीप्तिशाली पूषा! आप धन के प्रवाह हैं, धन की राशि हैं, आप ही स्तुति करने वाले स्तोत्राओं के मित्र हैं।[ऋग्वेद 6.55.3]
Hey radiant Pusha! You are the flow & lord of wealth and friend of Stotas who pray-worship you. 
पूषणं न्व १ जाश्वमुप स्तोषाम वाजिनम्। स्वसुर्यो जार उच्यते
आज हम उन्हीं छाग (बकरी) वाहन और अन्न युक्त सूर्य या पूषा की प्रार्थना करते हैं, जिन्हें लोग भगिनी या उषा का प्रणयी अथवा जार कहते हैं।[ऋग्वेद 6.55.4]
GALLANT :: श्रेष्ठ, बहादुर, वीर; heroic, brave, plucky, mettlesome, hardy, valiant, daring, valorous, excellent, best, surpassing, nailing, spanking.
We worship possessor of food grains Sury Dev-Sun or Pusha Dev who ride the goat and possess food grains, whom people call gallant sister or paramour of Usha.  
मातुर्दिधिषुमब्रवं स्वसुर्जारः शृणोतु नः। भ्रातेन्द्रस्य सखा मम
रात्रि रूपिणी माता के पति पूषा की हम प्रार्थना करते हैं। अपनी भगिनी (उषा) के जार पूषा (सूर्य) हमारा स्तोत्र श्रवण करें। इन्द्र देव के भ्राता पूषा हमारे मित्र होवें।[ऋग्वेद 6.55.5]
We pray-worship Pusha Dev who is the husband of the Night like a mother. Let sister Usha and Zar-Pusha, the Sun, listen-respond to our Strotr. Let Pusha Dev brother of Indr Dev become our friend. 
आजासः पूषणं रथे निशृम्भास्ते जनश्रियम्। देवं वहन्तु बिभ्रतः
रथ में नियुक्त छागगण स्तोताओं के आश्रय पूषा का रथ वहन करते हुए उन्हें यहाँ ले आवें।[ऋग्वेद 6.55.6]
Let the goats deployed in the charoite bring Pusha Dev, who is the asylum of Stotas, here.(20.10.2023)
ऋग्वेद संहिता, षष्ठम मण्डल सूक्त (56) :: ऋषि :- भरद्वाज बार्हस्पत्य; देवता :- पूषा,  छन्द :- गायत्री, अनुष्टुप्।
य एनमादिदेशति करम्भादिति पूषणम्। न तेन देव आदिशे
जो पूषा को घी मिले जौ के सत्तू का भोगी कहकर उनकी प्रार्थना करता है, उसे अन्य देवों की प्रार्थना नहीं करनी पड़ती।[ऋग्वेद 6.56.1]
One who worship Pusha Dev by saying that he is the eater of roasted & grinded barley mixed with Ghee; need no other demigods-deities.
उत घा स रथीतमः सख्या सत्पतिर्युजा। इन्द्रो वृत्राणि जिघ्नते
रथि श्रेष्ठ, साधुओं के रक्षक और सुप्रसिद्ध इन्द्र देव अपने मित्र पूषा की सहायता से शत्रुओं का संहार करते हैं।[ऋग्वेद 6.56.2]
Best amongest the charioteers, protector of the sages famous-honoured Indr Dev destroy the enemies with the help of his friend Pusha Dev. 
उतादः परुषे गवि सूरश्चक्रं हिरण्ययम्। न्यैरयद्रथीतमः
चालक और रवि श्रेष्ठ पूषा सूर्य के हिरणमय रथ का चक्र नियत परिचालित करते हैं।[ऋग्वेद 6.56.3]
Driver and best Ravi, Pusha cycle-drive the golden charoite of Sun in a fixed manner-regularly.
यदद्य त्वा पुरुष्टुत ब्रवाम दस्त्र मन्तुमः। तत्सु नो मन्म साधय
हे बहुलोक वन्दनीय, मनोहर मूर्ति और ज्ञानी पूषा! प्रतिदिन हम जिस धन को लक्ष्य करके आपकी प्रार्थना करते हैं, उसी वांच्छित धन को हमें प्रदान करें।[ऋग्वेद 6.56.4]
Hey beautiful and enlightened Pusha Dev, revered-honoured in many abodes! Grant us the wealth for which we pray-worship you.
इमं च नो गवेषणं सातये सीषधो गणम्। आरात्पूषन्नसि श्रुतः
हे पूषा! गौ की कामना करने वाले इन समस्त मनुष्यों को गौ प्राप्त करावें। आप समीप और दूर से भी प्रसिद्ध हैं अर्थात् आप सर्वव्यापक हैं।[ऋग्वेद 6.56.5]
Hey Pusha Dev! Grant cows to the humans who desire them. You are famous far & wide i.e., you pervade all places.
आ ते स्वस्तिमीमह आरे अघामुपावसुम्।
अद्या च सर्वतातये श्वश्च सर्वतातये
हे पूषा देव! हम आज और कल के यज्ञों के सम्पादन के लिए आपकी उसी रक्षा को चाहते हैं। आप हमें धन प्रदान करें और पाप कर्म से बचावें।[ऋग्वेद 6.56.6]
Hey Pusha Dev! We seek asylum under you for conducting Yagy today and tomorrow. Grant us wealth and protect-save us from committing-doing sins.(21.10.2023)
ऋग्वेद संहिता, षष्ठम मण्डल सूक्त (57) :: ऋषि :- भरद्वाज बार्हस्पत्य; देवता :- पूषा,  छन्द :- त्रिष्टुप्, जगती।
इन्द्रा नु पूषणा वयं सख्याय स्वस्तये। हुवेम वाजसातये 
हे इन्द्र देव और पूषा देव! अपने मंगल के लिए आज हम आपकी मित्रता और अन्न की प्राप्ति के लिए आपका आवाहन करते हैं।[ऋग्वेद 6.57.1]
Hey Indr Dev & Pusha Dev! We invoke you for your friendship for our welfare and food grains.
सोममन्य उपासदत्पातवे चम्वोः सुतम्। करम्भमन्य इच्छति
आप में से एक (इन्द्र देव) पात्र स्थित अभिषुत सोमरस का पान करने के लिए जाते हैं और दूसरे (पूषा) जौ का सत्तू खाने की इच्छा करते हैं।[ऋग्वेद 6.57.2]
Indr Dev is desirous of drinking Somras and Pusha Dev wish to eat roasted & grounded barley.
अजा अन्यस्य वह्नयो हरी अन्यस्य संभृता। ताभ्यां वृत्राणि जिघ्नते
एक के वाहन-सवारी छाग हैं और दूसरे के वाहन स्थूल काय दो अश्व हैं। दूसरे (इन्द्र देव) इन्हीं दोनों अश्वों के साथ वृत्रासुर का संहार करते हैं।[ऋग्वेद 6.57.3]
The vehicle-conveyance of Indr Dev are two Stallion named Hari, while Pusha Dev rides the goats.
यदिन्द्रो अनयद्रितो महीरपो वृषन्तमः। तत्र पूषाभवत्सचा
जिस समय अतिशय वर्षक इन्द्र देव महावृष्टि करते हैं, उस समय इनके सहायक पूषा ही होते हैं।[ऋग्वेद 6.57.4]
When Indr Dev resort to downpour, Pusha Dev assist him.
तां पूष्णः सुमतिं वयं वृक्षस्य प्र वयामिव। इन्द्रस्य चा रभामहे
हम वृक्ष की सुदृढ़ शाखा के सदृश पूषा और इन्द्र देव की कृपा दृष्टि के ऊपर ही निर्भर रहते है।[ऋग्वेद 6.57.5]
कृपा दृष्टि :: regard, grace, favour, obligation, condescension, pleasure, favour, mercy, blessing, benevolence. 
We depend-survive over the blessings-favours of Pusha & Indr Dev like the strong branch of a tree.
उत्पूषणं युवामहे ऽ भीशँरिव सारथिः। मह्या इन्द्रं स्वस्तये
जिस प्रकार सारथि लगाम खींचता है, उसी प्रकार हम भी अपने प्रहर्षित कल्याण के लिए पूषा और इन्द्र देव को अपने पास खींचते हैं।[ऋग्वेद 6.57.6]
प्रहर्षित :: प्रसन्न, हर्षित, आनंदित, कठोर या कड़ा, अकड़ा हुआ, संभोग के लिये उत्तेजित किया हुआ; excited.
The way the charoite drive pulls the reins we too are pulled-dragged towards Indr Dev & Pusha Dev for our welfare.(22.10.2023)
ऋग्वेद संहिता, षष्ठम मण्डल सूक्त (58) :: ऋषि :-  भरद्वाज बार्हस्पत्य; देवता :- पूषा,  छन्द :- त्रिष्टुप् जगती। 
शुक्रं ते अन्यद्यजतं ते अन्यद्विषुरूपे अहनी द्यौरिवासि।
विश्वा हि माया अवसि स्वधावो भद्रा ते पूषन्निह रातिरस्तु
हे पूषा! आपका यह रूप (दिन) शुक्लवर्ण है और अन्य रूप (रात्रि) केवल यजनीय हैं। इस प्रकार दिन और रात्रि के रूप विभिन्न प्रकार के हैं। आप सूर्य देव के सदृश प्रकाशमान हैं; क्योंकि आप सभी के दाता हैं और सब प्रकार के ज्ञान धारित करते है। इस समय आपका कल्याणकारी दान हमें प्राप्त होवे।[ऋग्वेद 6.58.1]
Hey Pusha! Your bright phase-day and the other one dark phase-night deserve worship. You are radiant like the Sun. You benefit all and is enlightened. Let us receive your donation meant for welfare.
अजाश्वः पशुपा वाजपस्त्यो धियं जिन्वो भुवने विश्वे अर्पितः।
अष्ट्रां पूषा शिथिरामुद्वरीवृजत् संचक्षाणो भुवना देव ईयते
जो छाग वाहन और पशु पालक हैं, जिनका घर अन्न से परिपूर्ण है, जो स्तोताओं के प्रीतिदाता हैं, जो अखिल भुवनों के ऊपर स्थापित हैं, वही देव (पूषा) सूर्य रूप से समस्त प्राणियों को प्रकाशित करके और अपने हाथ से आरा उठाकर नभो मण्डल में जाते हैं।[ऋग्वेद 6.58.2]
He who nurture the goats and animals, his house is full of food grains, loves-affectionate to the Stotas, placed at the highest point of all abodes, that Pusha Dev raise the saw in his hands and goes to the sky-space.
यास्ते पूषन्नावो अन्तः समुद्रे हिरण्ययीरन्तरिक्षे चरन्ति।
ताभिर्यासि दूत्यां सूर्यस्य कामेन कृत श्रव इच्छमानः
हे पूषा देव! आपकी जो सारी हिरण्यमयी नौकाएँ समुद्र मध्यस्थित अन्तरिक्ष में चलती हैं, उनके द्वारा आप सूर्य देव का दूत कार्य करते हैं। आप हव्यरूप अन्न चाहते हैं। स्तोता लोग आपको स्वेच्छा से दिए पशु आदि के द्वारा वशीभूत करते हैं।[ऋग्वेद 6.58.3]
Hey Pusha Dev! Your golden vessels, ships, boats stationed in the ocean navigate functioning as the messenger of Sury Dev. You are desirous of offerings in the form of food grains. The Stotas wilfully offer you animals to seek your blessings.
पूषा सुबन्धुर्दिव आ पृथिव्या इळस्पतिर्मघवा दस्मवर्चाः।
यं देवासो अददुः सूर्यायै कामेन कृतं तवसं स्वञ्चम्
पूषा स्वर्ग और पृथ्वी के शोभन मित्र हैं, अन्न के अधिपति हैं, ऐश्वर्यशाली हैं, मनोहरमूर्ति हैं। वे बलशाली, स्वेच्छा से दिये पशु आदि के द्वारा प्रसन्नता के योग्य और शोभन गमनकर्ता हैं। उन्हें देवों ने सूर्यदेव की पत्नी के पास भेजा था।[ऋग्वेद 6.58.4]
Pusha Dev is a great friend of the earth and heavens, lord of food grains and possess grandeur and is attractive. He is mighty, feels happy by offering animals willingly and moves gracefully. The demigods-deities sent him to the wife of Sury Dev.(23.10.2023)
प्र पूषणं वृणीमहे युज्याय पुरूवसुम्।
स शक्र शिक्ष पुरुहूत नो धिया तुजे राये विमोचन
मित्रता की प्राप्ति के लिए हम बहु धन वाले पूषा देव का वरण करते हैं। हे अनेकों द्वारा आहूत और पाप विमोचक पूषन् देव! अपनी बुद्धि के द्वारा धन की प्राप्ति और शत्रु विनाश के लिए हमें सामर्थ्यवान् बनावें।[ऋग्वेद 8.4.15]
We accept Pusha Dev, possessor of various kind of wealth for friendship. Hey Pusha Dev, worshiped by several people and reliever of sins! Make us capable of earning money with the help of our intelligence and destruction of enemies.
सं नः शिशीहि भुरिजोरिव क्षुरं रास्व रायो विमोचन।
त्वे तन्नः सुवेदमुस्रियं वसु यं त्वं हिनोषि मर्त्यम्
(नाई की) बाँह में रहने वाले छुरे की तरह हमें तीक्ष्ण बुद्धि प्रदान करें। हे पाप विमोचक! हमें धन प्रदान करें। आपका गोधन हमारे लिए सुलभ हों। आप मनुष्यों के लिए यह धन भेजा करते हैं।[ऋग्वेद 8.4.16]
Grant us sharp intelligence like the knife of the barber. Hey reliever of sins! Grant us money. Let your cows be available to us. You keep on sending money for the humans.
वेमि त्वा पूषन्नृञ्जसे वेमि स्तोतव आघृणे।
न तस्य वेम्यरणं हि तद्वसो स्तुषे पज्राय साग्ने
हे पूषन्देव! मैं आपको प्रसाधित करने की इच्छा करता हूँ। हे दीप्तिमान् पूषन्! आपकी स्तुति करने की इच्छा करता हूँ। अन्य देवताओं की स्तुति करने की मैं इच्छा नहीं करता; क्योंकि वे हितकर नहीं हैं। निवास प्रद, स्तोता और साम मन्त्र युक्त पत्र (कक्षीवान्) को अभिलषित धन प्रदान करें।[ऋग्वेद 8.4.17]
Hey Pusha Dev! I wish to decorate you. Hey radiant Pusha Dev! I wish to worship you. I do not wish to pray to other demigods-deities since they are not of no use to me. Grant Stota-Kakshiwan desired wealth alongwith residence and Sam Mantr.
परा गावो यवसं कच्चिदाघृणे नित्यं रेक्णो अमर्त्य।
अस्माकं पूषन्नविता शिवो भव मंहिष्ठो वाजसातये
हे दीप्ति वाले और अमर पूषन्देव! किसी समय हमारी गौवें चरने के बाद लौटती हैं। हमारा गौरूप धन नित्य हों। आप हमारे रक्षक और मङ्गलकारी हों। अन्नदान के लिए महान् होवें।[ऋग्वेद 8.4.18]
Hey aurous and immortal Pusha Dev! Our cows are like wealth for us, they graze and return home. You should be our protector and beneficial to us. You should be a great donor of food grains.
स्थूरं राधः शताश्वं कुरुङ्गस्य दिविष्टिषु।
राज्ञस्त्वेषस्य सुभगस्य रातिषु तुर्वशेष्वमन्महि
कुरुङ्ग नाम के दीप्त और सौभाग्यवान् राजा की स्वर्ग प्राप्ति के लिए यज्ञ और दान में मनुष्यों के बीच हमने प्रचुर और सौ अश्वों से युक्त धन को प्राप्त किया।[ऋग्वेद 8.4.19]
We obtained lot of wealth and hundred horses in the Yagy conducted for the aurous & lucky king Kurang, who wished to attain heavens.
धीभिः सातानि काण्वस्य वाजिनः प्रियमेधैरभिद्युभिः।
षष्टिं सहस्त्रानु निर्मजामजे निर्यूथानि गवामृषिः
कण्व पुत्र और हवि वाले मेधातिथि और उनके स्तोताओं द्वारा भजन के योग्य तथा दीप्ति पाये हुए प्रियमेध नाम के ऋषियों द्वारा सेवित एवं अती पवित्र साठ हजार गौवों को कण्वपुत्र मेधातिथि ने सबके अन्त में प्राप्त किया।[ऋग्वेद 8.4.20]
Son of Kavy Medhatithi and other Stotas, worthy of recitation of sacred hymns, attained extremely pure sixty thousand cows after others; used-served by Priymedh Rishis.
वृक्षाश्चिन्मे अभिपित्वे अरारणुः। गां भजन्त मेहनाश्वं भजन्त मेहना 
मेरे धन पाने पर वृक्षों ने भी हर्षध्वनि की, इन्होंने प्रशंसनीय गोधन और अश्वधन प्राप्त किया।[ऋग्वेद 8.4.21]
Even the trees made sound reflecting happiness when I got money, cows and horses.{20.03.2023)
 
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संतोष महादेव-धर्म विद्या सिद्ध व्यास पीठ (बी ब्लाक, सैक्टर 19, नौयडा)
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