Friday, September 22, 2023

COWS गौ (Rig Ved ऋग्वेद)

COWS गौ
CONCEPTS & EXTRACTS IN HINDUISM
By :: Pt. Santosh Bhardwaj

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ॐ गं गणपतये नम:।
अक्षरं परमं ब्रह्म ज्योतीरूपं सनातनम्।
गुणातीतं नीराकारं स्वेच्छामयमनन्तजम्॥
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भुर्मा ते संगोऽस्त्वकर्मणि
[श्रीमद्भगवद्गीता 2.47]
ऋग्वेद संहिता, षष्ठम मण्डल सूक्त (28) :: ऋषि :- भरद्वाज बार्हस्पत्य; देवता :- गौ, इन्द्र;  छन्द :-त्रिष्टुप्, जगती, अनुष्टुप्।
आ गावो अग्मन्नुत भद्रमक्रन्त्सीदन्तु गोष्ठे रणयन्त्वस्मे।
प्रजावतीः पुरुरूपा इह स्युरिन्द्राय पूर्वीरुषसो दुहानाः
गौएँ हमारे घर आवें और हमारा कल्याण करें। वे हमारे गोष्ठ में उपवेशन करें और हमारे ऊपर प्रसन्न हों। इस गोष्ठ में नाना वर्ण वाली गौएँ सन्तति सम्पन्न होकर प्रात: काल में इन्द्र देव के लिए दुग्ध प्रदान करें।[ऋग्वेद 6.28.1]
Let cows come to our house and resort to our welfare. They should reside in our cow shed and become happy with us. Cows of different colours should have progeny and yield milk for Indr Dev in the morning.
इन्द्रो यजने पृणते च शिक्षत्युपेद्ददाति न स्वं मुषायति।
भूयोभूयो रयिमिदस्य वर्धयन्नभिन्ने खिह्ये नि दधाति देवयुम्
इन्द्र देव यज्ञ करने वाले और प्रार्थना करने वाले को अपेक्षित धन प्रदान करते हैं। वे उन्हें सर्वदा धन प्रदान करते हैं और उनके स्वकीय धन को कभी नहीं लेते। वे निरन्तर उनके धन को बढ़ाते हैं और उन इन्द्राभिलाषी को शत्रुओं के द्वारा सुरक्षित स्थान में स्थापित करते हैं।[ऋग्वेद 6.28.2]
Indr Dev grants wealth to the doer of Yagy and his worshipers. He just keep on granting them money and do not take their wealth. He continuously increase their wealth and keep them at safe place.
न ता नशन्ति न दभाति तस्करो नासामामित्रो व्यथिरा दधर्षति।
देवाँश्च याभिर्यजते ददाति च ज्योगित्ताभिः सचते गोपतिः सह
गौएँ हमारे समीप से नष्ट न हों। चोर हमारी गौओं को न चुरायें। शत्रुओं का शस्त्र हमारी गौओं को क्षति न पहुँचावें । गोस्वामी याजकगण जिन गौओं से इन्द्रादि का यजन करते हैं और जिन गौओं को इन्द्रदेव के लिए प्रदान करते हैं, उन गौओं के साथ वे चिरकाल तक सुखी रहें।[ऋग्वेद 6.28.3]
Our cows should be safe. Thieves should not steal them. Enemy should not harm them. The owner of cows who worship Indr Dev with cows and grant them to him, should survive-live with the cows for long.
न ता अर्वा रेणुककाटो अश्नुते न संस्कृतत्रमुप यन्ति ता अभि।
उरुगायमभयं तस्य ता अनु गावो मर्तस्य वि चरन्ति यजनः
धूल उड़ाने वाले वेगगामी अश्व भी उन गौओं को न पा सकेगें। इन गौओं पर वध करने के लिए प्रहार न करें। यागशील मनुष्य की गौएँ निर्भय और स्वाधीन भाव से भ्रमण करती हैं।[ऋग्वेद 6.28.4]
The speeded horses who raise dust, will not be able to have-catch these cows. Do not strike the cows for killing them. Cows of the person who perform Yagy roam fearlessly and independently. 
गावो भगो गाव इन्द्रो मे अच्छान् गावः सोमस्य प्रथमस्य भक्षः।
इमा या गावः स जनास इन्द्र इच्छामीद्धृदा मनसा चिदिन्द्रम्
गौएँ हमें धन प्रदान करनी वाली हों। इन्द्र देव हमें गौएँ प्रदान करें। गाय का दूध सबसे पहले सोमरस में मिलाया जाता है। हे मनुष्यों! ये गौएँ इन्द्र रूप हैं, श्रद्धायुक्त मन से हम जिनकी कामना करते हैं।[ऋग्वेद 6.28.5]
Let the cows yield money to us. Let Indr Dev grant cows to us. Cows milk is mixed with Somras at first. Hey Humans! These cows are like Indr Dev which are worshiped by us with faith-honour.
यूयं गावो मेदयथा कृशं चिदश्रीरं चित्कृणुथा सुप्रतीकम्।
भद्रं गृहं कृणुथ भद्रवाचो बृहद्वो वय उच्यते सभासु
हे गौओं! आप हमें पुष्टि प्रदान करें। आप क्षीण और अमंगल अंग को सुन्दर बनावें। हे कल्याणयुक्त वचन वाली गौओं! हमारे गृह को कल्याणयुक्त करें। हे गौओं! यज्ञशाला में आपका महान् अन्न ही कीर्तित होता है।[ऋग्वेद 6.28.6]
Hey cows! Nourish us. Make our weak and unfit organs strong. Hey cows speaking welfare words! Make out house full of welfare. Hey cows! Your great food grains are appreciated-offered in the Yagy house.
प्रजावतीः सूयवसं रिशन्तीः शुद्धा अपः सुप्रपाणे पिबन्तीः।
मा वः स्तेन ईशत माघशंसः परि वो हेती रुद्रस्य वृज्याः
हे गौओ! आप सन्तान युक्त होवें। शोभन तृण का भक्षण करें और सुख से प्राप्त करने में योग्य तालाब आदि का निर्मल जल पीवें। आपका शासक चोर न हो और व्याघ्रादि आपके ईश्वर न हो अर्थात् हिंसक जन्तु आपके ऊपर आक्रमण न करें। कालात्मक परमेश्वर का आयुध आपसे दूर रहे।[ऋग्वेद 6.28.7]
Hey cows! You should have progeny. Eat good straw and drink the water from the pond comfortably. Your master-owner should not be a thief, the beasts should not be able to harm-overpower you. The weapons of death of the Almighty should keep away from you, at all times.
उपेदमुपपर्चनमासु गोषूप पृच्यताम्। उप ऋषभस्य रेतस्युपेन्द्र तव वीर्ये
हे इन्द्र देव! आपके बलाधान के निमित्त गौओं की पुष्टि प्रार्थित हों एवं गौओं के गर्भाधानकारी वृषभों का बल प्रार्थित हो अर्थात् गौओं के पुष्ट होने पर तत्सम्बन्धी क्षीरादि द्वारा इन्द्रदेव सन्तुष्ट होते हैं।[ऋग्वेद 6.28.8]
Hey Indr Dev! Its requested that the cows should be strong for your growth and the strength of the bulls who lead to their fertilisation. Indr Dev should be satisfied with the milk, curd, Ghee etc yielded by the cows.
इयं या नीच्यर्किणी रूपा रोहिण्या कृता। चित्रेव प्रत्यदर्यायत्यन्तर्दशसु बाहुषु
दशों दिशाओं से आगमन करने वाली, गौ के सदृश दर्शनीय उषा देवी सूर्य देव के तेज से उत्पन्न हुई हैं।[ऋग्वेद 8.101.13]
Usha Devi who travels in all ten directions, appearing like a cow have evolved from the aura-radiance of Sury Dev.
माता रुद्राणां दुहिता वसूनां स्वसादित्यानाममृतस्य नाभिः।
प्र नु वोचं चिकितुषे जनाय मा गामनागामदितिं वधिष्ट
हम विद्वत् गण लोगों से यही कहते हैं कि गौएँ रुद्रों की माता, वसुओं की पुत्री, आदित्यों की बहन तथा अमृत की मूल हैं। आप उनकी हिंसा न करें।[ऋग्वेद 8.101.15]
We ask the learned people that cow are the mother of Rudr Gan, daughters of Vasus, sister of Adity Gan and the basis of elixir-nectar. Do not harm them.
वचोविदं वाचमुदीरयन्तीं विश्वाभिर्धीभिरुपतिष्ठमानाम्।
देवीं देवेभ्यः पर्येयुषीं गामा मावृक्त मर्यो दध्रचेताः
जो वाणी को प्रेरणा प्रदत्त करती हैं, सभी को देवत्व प्रदान करती हैं, हर प्रकार से जो वर्णित की जाती हैं और हमारी ओर आती हैं, इस प्रकार की गौरूपिणी देवी को हीन बुद्धि वाले मनुष्य ही त्यागते हैं।[ऋग्वेद 8.101.16]
Only the ignorant & wicked reject the goddess in the form of cow who comes to us, grants divinity, leadership, inspire the voice and described in this manner.
Those who eat beef-cow's meat deserve to put in lower species and hells.
चिदसि मनासि धीरसि दक्षिणासि क्षत्रियासि यज्ञियास्यदितिरस्युभयतः शीष्र्णी।
सा नः सुप्राची सुप्रतीच्येधि मित्रस्त्वा पदि बध्नीतां पूषाऽध्वनस्पात्विन्द्रायाध्यक्षाय॥
हे वाग्देवता रूप सोम क्रयणी! आप चित्त स्वरूपा हैं, आप मनस्वरूपा हैं, आप बुद्धिस्वरूपा हैं। हे गाय! आप प्रदान करने योग्य द्रव्य रूपी उत्तम दक्षिणा हैं। कर्म से आप क्षत्रिय वर्ण हैं तथा सोम सम्बन्धिनी हैं। आप यज्ञ में मन्त्र रूप में प्रयोग किये जाने योग्य हैं। आप अखण्डित अथवा देवमाता अदिति हैं। आप कठोर तथा मृदु वाणीरूप दो शीश वाली हैं। आप अग्रसर करने वाली तथा पीछे हटने में सहायता प्रदान करने वाली हैं। आप यज्ञ से बाहर न जा पायें इसके लिये मित्र आपके दायें पाँव में स्नेह रूपी पाश बाँध दें। देवताओं के अध्यक्ष देवराज इन्द्र को हर्षित करने हेतु पूषादेव यज्ञ मार्ग की सुरक्षा करें।[यजुर्वेद 4.19]
(क्रयण प्रभृति-सोम)
Hey Som, a form of Vag Dev! You form the mood, innerself & intellect. Hey cow! You are the best donation. By nature you are like Kshatriy and related to Som. You are uttered as a Mantr in the Yagy. You are unfragmented Dev Mata Aditi. You posses both harsh and soft language. You help us march forward and retreat as well. Do not move out of the Yagy. Let Mitr Dev tie your legs with affection. Hey Push Dev granting pleasure to Indr Dev, lord-king of demigods; protect the Yagy.
अनु त्वा माता मन्यतामनु पिताऽनु भ्राता सगर्योऽनु सखा सयूथ्यः।
सा देवि देवमच्छेहीन्द्राय सोम रुद्रस्त्वा वर्त्तयतु स्वस्ति सोमसखा पुनरेहि॥
हे गाय! यज्ञ के निमित्त सोम क्रय करने के मूल्य के रूप में आपको आपकी माता, आपके पिता, आपके सहोदर-भ्राता, साथ-साथ रहने वाले सखा (वृषभ) आज्ञा प्रदान करें। हे दिव्य गुणों से युक्त वाग्देवि! इन्द्र देव के निमित्त सोम प्राप्त करने हेतु आप गमन करें। सोम ग्रहण करने के पश्चात् रुद्र देव आपको हम लोगों के निकट लेकर आगमन करें। आप सोम सहित हमारा मंगल करते हुए फिर से यहाँ आगमन करें।[यजुर्वेद 4.20]
Hey cow! Let your mother, father, brother and the associates-bulls allow you to be purchased as the price of Som, for the Yagy. Hey Vag Devi, possessing divine traits! Proceed to receive Som for Indr Dev. After receiving Som let Rudr Dev move you near us. Come here again with Som for our welfare-well wishes.
वस्व्यस्यदितिरस्यादित्यासि रुद्रासि चन्द्रासि।
बृहस्पतिष्ट्वा सुम्ने रम्णातु रुद्रो वसुभिरा चके॥
हे सोम क्रयणी गौ! आप वसु देवता की शक्ति-स्वरूपा हैं। आप देव माता अदिति हैं। आप द्वादश आदित्य रूपा हैं। आप एकादश रुद्र स्वरूपा हैं। आप चंद्र रूपा हैं। बृहस्पति देव आपको आह्लादित करें। रुद्र देवता आठ वसुओं के साथ आपकी रक्षा करें।[यजुर्वेद 4.21]
Hey cow bartered for Som! You are the strength of Vasu Dev. You are divine mother Aditi. You are like twelve Adity Gan. You are like eleven Rudr Gan. You are like Moon. Let Brahaspati Dev grant you pleasure. Rudr Dev should protect you along with eight Vasu Gan.
अदित्यास्त्वा मूर्धन्नाजिघर्मि देवयजने पृथिव्या इडायास्पदमसि घृतवत् स्वाहा।
अस्मे रमस्वास्मे ते बन्धुस्त्वे रायो मे रायो मा वय रायस्पोषेण वियौष्म तोतो रायः
सारी धरती में उत्तम स्थल के रूप में देवताओं के पूजन के लिए प्रयोग किये जाने वाले स्थान (यज्ञशाला) में हे घृत! मैं आपको तपाता हूँ। हे यज्ञ स्थल! आप गाय के पदचिन्ह हैं। आपके लिये यह आहुति है। आप पृथ्वी की अधिष्ठात्री देवी हैं। हमारे द्वारा प्रदान की गयी घृताहुति से आप तृप्त हों। आप वैभवशाली हैं, हमें अपना मित्र समझकर धन-धान्य प्रदान करके समृद्धशाली बनायें। हम इस प्रकार के ऐश्वर्य प्राप्त करने से वंचित न रहें।[यजुर्वेद 4.22]
Hey Ghee, I heat you at the Yagy site, the best place for the worship by demigods-deities over the whole earth! Hey Yagy site! You are the foot-hoops marks of cow. Its an offerings for you. You should be satisfied with our offering. You possess grandeur. Considering you as our friend, grant us wealth and food grains. You should not be deprived of this grandeur.
समख्ये देव्या धिया सं दक्षिणयोरुचक्षसा।
मा म आयुः प्रमोषीर्मो अहं तव वीरं विदेय तव देवि सन्दृशि॥
यजमान की पत्नी बोले, हे सोम क्रयणी देवि! प्रकाशमान, यज्ञीय प्रधान दक्षिणा के योग्य, विशाल नेत्र वाली आपको मैं पवित्र बुद्धि से अच्छी तरह से देखती हूँ। हमारी आयु को आप समाप्त न करें। आपकी आयु को हम विनष्ट न करें। हे गाय! आपकी दया-दृष्टि में रहते हुए हम बलशाली पुत्र को प्राप्त करें।[यजुर्वेद 4.23]
Wife of host should say, "Hey devi bought for Som! I look at you having aura, presiding the Yagy, suitable for Dakshina, having large eyes, with pious mind-inclination. Do not vanish our longevity". Hey cow, With you blessings we should get mighty son.
शुक्रं त्वा शुक्रेण क्रीणामि चन्द्रं चन्द्रेणामृतममृतेन। सग्मे ते गोरस्मे ते चन्द्राणि तपसस्तनूरसि प्रजापतेर्वर्णः परमेण पशुना क्रीयसे सहस्त्रपोषं पुषेयम्॥
चन्द्रमा के सदृश प्रमुदित करने वाले, सुस्वादिष्ट अमृत के समान हे सोम! आप प्रकाशमान हैं, अतः हम आपको दमकते हुए सुवर्ण से क्रय करते हैं। हे सोम विक्रेता! सोम क्रय करने के लिये दिये गये मूल्य के बदले आपको दी गयी गौ प्राप्त हो और बदले में हमें आपका सोमरस प्राप्त हो। हे अजे! तुम तप साधना करने वालों का पुण्य शरीर हो एवं सभी देवगणों को प्रिय, प्रजापति का शरीर हो। हे सोम! हम उत्तम पशुधन के द्वारा तुम्हें खरीदते हैं। अतः आप सहस्रों पुत्र-पौत्रों आदि को पुष्ट करने योग्य सम्पदाओं में बढ़ोत्तरी करें।[यजुर्वेद 4.26]
प्रमुदित :: मगन, आनंदित, संतोषमय, हँस मुख, प्रमुदित, विनोद पूर्ण, उत्साह युक्त, आनंदपूर्ण, फुर्तीला; merry, sprightly.
अज :: अजन्मा, ईश्वर, जीवात्मा; goat.
Granting pleasure like the Moon, tasty like the elixir, hey Som! You are luminous, therefore we buy with shinning gold. Hey seller of Som! You should get cows as your price for selling us Somras. Hey Almighty! You form the core of all those who perform pious-virtuous deeds, admired by demigods-deities and embodiment of Praja Pati. Hey Som! We buy-barter you with best cattle-animals. Hence nourish our thousands of sons and grandsons boosting their possessions-wealth.
    
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संतोष महादेव-धर्म विद्या सिद्ध व्यास पीठ (बी ब्लाक, सैक्टर 19, नौयडा)
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