Wednesday, December 10, 2014

DEVOTION भक्ति

DEVOTION क्ति 
CONCEPTS & EXTRACTS IN HINDUISM By:: Pt. Santosh Bhardwaj  
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Photoसत्य, त्रेता और द्वापर युग में ज्ञान और वैराग्य मुक्ति के साधन थे। कलियुग में केवल भक्ति ही ब्रह्म सायुज्य-मोक्ष की प्राप्ति करने वाली है। परमात्मा ने यही विचार करके सत्स्वरूप भक्ति की रचना की है। श्री हरी ने भक्ति को ज्ञान व वैराग्य पुत्र रूप में तथा मुक्ति को दासी के रूप में प्रदान किया। कलियुग में मुंक्ति पाखण्ड रूपी  दोष से पीड़ित होकर क्षीण होनी लगी और भक्ति की आज्ञा से तुरन्त बैकुण्ठलोक को चली गई। भक्ति के स्मरण करने पर मुक्ति धरालोक पर आती तो है, परन्तु तुरन्त चली जाती है। कलियुग एक ऐसा युग है, जिसमें मात्र प्रेमरूपी भक्ति  को धारण करने से प्राणी भगवान् के अभय धाम-लोक को प्राप्त करता है। इन लोगों को यमराज स्वप्न में भी परेशान नहीं करते। भूत, प्रेत, पिशाच, राक्षस या दैत्य आदि का साया भी ऐसे लोगों पर नहीं पड़ता। भगवान् मात्र भक्ति से ही वश में हो जाते हैं। मनुष्यों का सहस्त्रों जन्मों के पुण्य-प्रताप से भक्ति में अनुराग होता है। भक्ति से तो स्वयं भगवान् श्री कृष्ण चन्द्र भी सामने उपस्थित हो जाते हैं। जो भक्त से द्रोह करता है, वो तीनो लोकों में दुःख ही दुःख पाता है। प्रह्लाद और  ध्रुव ने भक्ति के माध्यम से श्री हरी को प्राप्त किया। श्रीमद्भागवत भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के माध्यम से महान विवेक की उत्पत्ति करता है। भगवान् वेद व्यास ने इसे भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की स्थापना के लिए इसे प्रकाशित किया। [श्रीमद्भागवत 2-4-71]
During the Saty, Treta and Dwapr age-cosmic era, Enlightenment and Relinquishment were the means to attain Salvation-Moksh-Assimilation in God-Liberation. During the present era Kali Yug, devotion is the only means-source of attaining the Almighty. The Almighty created Bhakti-devotion for the welfare of the Humans due to the intricate-devastating nature of Kali Yug leading to loss of virtues-righteousness-piousity-honesty-values. Kali Yug is the period during which the majority of the population will indulge in dishonesty-wretchedness-frauds-vulgarity-sensuality-sexuality-passions-un holi acts, Hippocracy, Atheism, sinful acts. People will moves away from morality, culture & values. They will discard & dishonor the scriptures. 5151 years of Kali Yug has passed and the total duration of it is 4,80, 000 years. Bhakti was blessed with Gyan & Vaeragy as sons and Mukti as a slave. Mukti could not survive the on slaught of Hippocracy-deceitful acts-hearsay, dissimulation and im posterity and left for the Vaikunth Lok-the Abode of the Almighty Bhagwan Shri Krashn. However, it visits off & on,  as and when, invited by Bhakti.
One who develops devotion in the Almighty with love & affection attains the Ultimate abode, which is the source of fearlessness. Those who are devoted to the Almighty are not shadowed by the Yum Raj-the deity of death and reincarnations.
Ghosts, demons, Rakshas, Shaitan-devils, giants, Dracula remain away from such people. The Almighty is controlled by the devotees and their devotion. The Almighty present himself before the devotee to bless him-grant vows. Any one who acts against the Bhakt-devotee find trouble-pain-sorrow-grief-torture in all abodes. Bhakt Prahlad (-the mighty demon king and son of Hirany Kashyap) & Dhruv got the Ultimate boons from the Almighty by virtue of Bhakti-devotion. Shri Mad Bhagvat generates the Bhakti, Gyan and Vaeragy, leading to evolution of prudence-brilliance, Piousity. Bhagwan Ved Vyas produced it, for the welfare of masses  and establishment of Bhakti, Gyan and Vaeragy leading to evolution of prudence-brilliance, during this era called Kali Yug.
मनुष्यों के लिए सर्व श्रेष्ठ धर्म वही है जिसमें भगवान श्री कृष्ण की भक्ति कामना रहित हो।  जो नित्य-निरन्तर बनी रहे; ऐसी भक्ति से ह्रदय आनन्द स्वरूप परमात्मा की उपलब्धि करके कृतकृत्य हो जाता है। भगवान् श्री कृष्ण की भक्ति होते ही अनन्य प्रेम से उनमें चित्त जोड़ते ही निष्काम ज्ञान और वैराग्य का आविर्भाव हो जाता है।  [श्रीमद्भागवत 2-1-(6-7)]
BHAKTI क्तिभक्ति के प्रभाव से भोजन प्रसाद में, भूख व्रत में, पानी अमृत में, संगीत कीर्तन में, कार्य सेवा में, यात्रा तीर्थ यात्रा में और मनुष्य भक्त में परिवर्तित हो जाते हैं। 
Bhakti transforms food into Prashad, Hunger into Fast, Water into Elixir, Music into Keertan, Action into Service, Work-deeds into Karm, Travel into Pilgrimage, Man into a Human being.
भक्ति को शास्त्रों में मुक्ति और मोक्ष से भी बढ़कर माना गया है। 
Devotion is superior to Liberation and Salvation as pr scriptures.






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