Thursday, February 13, 2014

EXCELLENT-ULTIMATE श्रेष्ठतम-सर्वोत्तम-सर्वोच्च

EXCELLENT-ULTIMATE
श्रेष्ठतम-सर्वोत्तम-सर्वोच्च 
CONCEPTS & EXTRACTS IN HINDUISM 
By:: Pt. Santosh Bhardwaj  
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Anything which is better than the best-has no parallel or equivalent, represents  the Almighty. There is nothing parallel to HINDUISM. Its the ULTIMATE. Indian Hindu calendar is Ultimate. No place on earth is comparable to India-Bharat-Hindustan-Jambu Dweep.
The terrain between the holy rivers Ganga and Yamuna is the best suited place for those who perform virtuous-righteous, pious deeds and practice asceticism, meditation, Varnashram Dharm. No other place a comparable to these.
विष्णु के समान कोई ध्येय नहीं है,
निराहार के समान कोई तपस्या नहीं है,
आरोग्य के समान कोई बहुमूल्य वास्तु नहीं है,
गंगा जी के समान कोई दूसरी नदी नहीं है, 
जगद्गुरु भगवान विष्णु को छोड़कर, दूसरा कोई बांधव नहीं है।
देवताओं में विश्वात्मा भगवान नारायण। 
जप करने योग्य मन्त्रों में गायत्री। 
नदियों में गंगा जी। 
सतियों में हिमालय पुत्री स्त्रियों में पार्वती। 
तेजस्वियों-तपनेवालों में सूर्य। 
लाभों में आरोग्य लाभ। 
मनुष्यों में ब्राह्मण। 
पुण्यों में परोपकार। 
विद्याओं में वेद।
मंत्रों में प्रणव। 
ध्यानों में आत्म चिन्तन।
तपस्याओं में सत्य और स्वधर्म पालन।
शुद्धियों में आत्म शुद्धि। 
दानों में अभयदान। 
गुणों में लोभ का त्याग। 
सब मासों में वैसाख। पापों का अन्त-सर्वोत्तम है जो कि वैसाख मास में प्रातः स्नान से प्राप्त होता है। 
पुण्यों का अन्त दूसरे की बुराई और चुगली से है अतः सर्वोत्तम है, इन से बचना। 
जीव का भारत वर्ष में जन्म ही दुर्लभ-सर्वोत्तम है।उससे भी दुर्लभ-सर्वोत्तम है, मानव योनि में जन्म। 
मनुष्य होने पर भी स्वधर्म का पालन दुर्लभ-सर्वोत्तम है उससे भी दुर्लभ-सर्वोत्तम है भगवान वासुदेव की भक्ति और वैसाख मास में एकादशी से पूर्णिमा तक पांच दिन गंगा, यमुना, नर्मदा, सरस्वती तीर्थ में स्नान का सुयोग-सर्वोत्तम है
जो धन होते हुए भी दान किये बिना मर जाता है उसका धन व्यर्थ है, अतः गुप्त दान-सर्वोत्तम है। 
अच्छे कुल में जन्म अच्छी मृत्यु, श्रेष्ठ भोग, सुख, सदा दान करने में प्रसन्नता उदारता तथा उत्तम धैर्य भगवत कृपा से ही प्राप्त होता-सर्वोत्तम है। 
कवियों में शुक्राचार्य। वृक्षों में पीपल। 
** पक्षियों में गरुड़, महान सर्पों में अनन्तनाग, जल में उत्पन्न होने वालों में कमल, देव-दैत्य-शत्रुओं में महादेव के चरणों का भक्त, क्षेत्रों में कुरु-जांगल, तीर्थों में पृथूदक, जलाशयों में उत्तर मानस (मान सरोवर), पवित्र वनों में नन्दन वन, लोकों में ब्रह्म लोक, धर्म कार्यों में सत्य प्रधान है। यज्ञों में अश्वमेध यज्ञ, छूने योग्य (स्पर्श सुख) वाले पदार्थों में पुत्र सुखदायक है। तपस्वियों में अगस्त्य, आगम शाश्त्रों में वेद श्रेष्ठ हैं, पुराणों में मत्स्य पुराण, संहिताओं में स्वयम्भू संहिता,  स्मृतियों में मनुस्मृति, तिथियों में अमावश्या, विषुवों में मेष और तुला राशि में सूर्य के संक्रमण संक्रान्ति के अवसर पर किया गया दान श्रेष्ठ होता है। 
नक्षत्रों में चन्द्रमा, जलाशयों में समुद्र, निश्चेष्ट करने वाले पाशों में नागपाश, धानों में शालि, दो पैर वालों में ब्राह्मण, जंगली जानवरों में शेर, फूलों में चमेली, नगरों में कांञ्ची, नारियों में रम्भा, आश्रमियों में गृहस्थ, श्रेष्ठ हैं। 
सप्तपुरियों में द्वारका, समस्त देशोँ में मध्यदेश, फलों में आम, मुकुलों में अशोक, जड़ी बूटियों में हरीतकी,सर्वश्रेष्ठ हैं। मूलों में कन्द , रोगों में अपच, श्वेत वस्तुओं में दुग्ध और वस्त्रों में रुई के कपड़े श्रेष्ठ हैं। 
कलाओं में गणित, विज्ञानों में इन्द्रजाल, शाकों में मकोय, रसों में नमक, ऊँचे पेड़ों में ताड़, कमल सरोवरों में पम्पासर, बनैले जीवों में भालू, वृक्षों में वट, ज्ञानियों में महादेव वरिष्ठ हैं। गौवों में काली गाय, बैलों में नील रंग का बैल. सभी दु:सह कठिन एवं भयंकर नरकों में वैतरणी प्रधान है।  पापियों में कृतघ्न प्रधानतम पापी होता है। दुराचारी और मित्र द्रोही कृतघ्न का करोड़ों वर्षों में भी निस्तार नहीं होता।**[श्री वामन पुराण] 
THE ULTIMATE BOON-सर्वोच्च इच्छा ::
Hindu has a firm faith that if he leaves the body at a holy place, he will attain salvation. Thousands and thousands of Hindus visit holy places, shrines, rivers in search of salvation after the death, in one or the other incarnations. They keep preparing them selves for the next birth by purifying their deeds in the current birth. Loss of lives at Kedar Nath and Badri Nath along with the two shrines of Gangotri and Yamunotri, has some thing in common i.e., the desire of the deceased to part their bodies during their last journey at the feet of the Almighty, i.e., in Dev Bhumi. Its a tradition in India to keep shroud during the pilgrimage, especially by the old people, who have renounced the world. 
One must not grieve for the departed souls. Their boons-desires have been fulfilled. The God is omniscient-having infinite knowledge/knowledge of every thing, omnipotent-having infinite power and benevolent-kind & helpful. One should pray to the God to provide the departed souls with peace and renunciation, instead of questioning his wisdom.
People believe that the God punishes us for our evil acts, sins and misdeeds. His ways are didactic-intended to teaching/explain/alert the mankind and penal-providing punishment for wicked actions.
There are hints-prophesies in Sanat Sanhita pertaining to blocked of roads/paths/tracks to Badri Nath and Kedar Nath that Bhagwan Shiv will emerge-replicate, elsewhere-Bhavishy (-future) Badri, when the present sites become inaccessible. Bhavishy Kedar, on the out skirts of Joshi Math is believed to be a place, where he has already emerged as Swambhu (-self manifested ) Shiv Ling, has been rising on its own in the past few years.. It has become almost as big as the original Ling of Kedar Nath Ji.
One should avoid visiting the shrines-Holy places for the purpose of picnic/excursion/time pass/honey Moon, since any visit of this nature, accompanied with evils/wicked-vicious acts may land him in trouble.
माहात्म्य की दृष्टि से गीता के अठरहवें अध्याय का श्रवण-अध्ययन सायुज्य मुक्ति प्रदान करने वाला है। गीता का श्रवण-अध्ययन वेदों-पुराणों के पाठ से भी उत्तम फलदायक है। 




BADRI NATH DHAM
KEDAR NATH DHAM



YAMNOTRI DHAM





GANGORTI DHAM








   




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